18 अक्टूबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (12:19 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (15:41 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:51 पर और सूर्यास्त 18:26 पर है। राहुकाल 09:45 से 11:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:51 – 18:26
रात 06:52 तक
तिथि
द्वादशी, 12:19 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 15:41 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:51 – 08:18टालें
शुभ08:18 – 09:45शुभ
रोग09:45 – 11:12टालें
उद्वेग11:12 – 12:39टालें
चर12:39 – 14:06सामान्य
लाभ14:06 – 15:32शुभ
अमृत15:32 – 16:59शुभ
काल16:59 – 18:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:26 – 19:59शुभ
उद्वेग19:59 – 21:32टालें
शुभ21:32 – 23:06शुभ
अमृत23:06 – 00:39शुभ
चर00:39 – 02:12सामान्य
रोग02:12 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:18टालें
लाभ05:18 – 06:52शुभ

18 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 12:19 तक
कृष्ण त्रयोदशी 13:52, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 17:49, 19 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 01:48, 19 अक्टू॰ तक
इंद्र 02:04, 20 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 12:19 तक
गर 01:03, 19 अक्टू॰ तक
वणिज 13:52, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:11 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:51
सूर्यास्त
18:26
चंद्रोदय
04:02
चंद्रास्त
16:37
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:02

अशुभ समय

राहुकाल
09:45 – 11:12
यमगंड
14:06 – 15:32
गुलिक काल
06:51 – 08:18

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5107:49दिन
गुरु07:4908:47दिन
मंगल08:4709:45दिन
सूर्य09:4510:43दिन
शुक्र10:4311:41दिन
बुध11:4112:39दिन
चंद्र12:3913:37दिन
शनि13:3714:34दिन
गुरु14:3415:32दिन
मंगल15:3216:30दिन
सूर्य16:3017:28दिन
शुक्र17:2818:26दिन
बुध18:2619:28रात
चंद्र19:2820:30रात
शनि20:3021:32रात
गुरु21:3222:35रात
मंगल22:3523:37रात
सूर्य23:3700:39रात
शुक्र00:3901:41रात
बुध01:4102:43रात
चंद्र02:4303:45रात
शनि03:4504:47रात
गुरु04:4705:49रात
मंगल05:4906:52रात

अयनांश 24.2174° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।