1 सितंबर 2027 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 1 सितंबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 सितंबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (19:50 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (19:48 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:36 पर और सूर्यास्त 19:11 पर है। राहुकाल 12:54 से 14:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:36 – 19:11
रात 06:37 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:50 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 19:48 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:36 – 08:11शुभ
अमृत08:11 – 09:45शुभ
काल09:45 – 11:19टालें
शुभ11:19 – 12:54शुभ
रोग12:54 – 14:28टालें
उद्वेग14:28 – 16:02टालें
चर16:02 – 17:37सामान्य
लाभ17:37 – 19:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:11 – 20:37टालें
शुभ20:37 – 22:02शुभ
अमृत22:02 – 23:28शुभ
चर23:28 – 00:54सामान्य
रोग00:54 – 02:19टालें
काल02:19 – 03:45टालें
लाभ03:45 – 05:11शुभ
उद्वेग05:11 – 06:37टालें

1 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 19:50 तक
शुक्ल द्वितीया 16:50, 2 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 17:36, 2 सित॰ तक
योग
सिद्ध 17:45 तक
साध्य 14:09, 2 सित॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 09:29 तक
बव 19:50 तक
बालव 06:17, 2 सित॰ तक
कौलव 16:50, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 01:13, 2 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
19:11
चंद्रोदय
07:01
चंद्रास्त
19:33
दिनमान
12h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:19 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:54 – 14:28
यमगंड
08:11 – 09:45
गुलिक काल
11:19 – 12:54

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3607:39दिन
चंद्र07:3908:42दिन
शनि08:4209:45दिन
गुरु09:4510:48दिन
मंगल10:4811:51दिन
सूर्य11:5112:54दिन
शुक्र12:5413:56दिन
बुध13:5614:59दिन
चंद्र14:5916:02दिन
शनि16:0217:05दिन
गुरु17:0518:08दिन
मंगल18:0819:11दिन
सूर्य19:1120:08रात
शुक्र20:0821:05रात
बुध21:0522:02रात
चंद्र22:0222:59रात
शनि22:5923:57रात
गुरु23:5700:54रात
मंगल00:5401:51रात
सूर्य01:5102:48रात
शुक्र02:4803:45रात
बुध03:4504:42रात
चंद्र04:4205:39रात
शनि05:3906:37रात

अयनांश 24.2435° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।