13 अप्रैल 2027 को लेह का चौघड़िया

मंगलवार, 13 अप्रैल 2027, लेह, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 13 अप्रैल 2027 को लेह में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (17:29 तक), नक्षत्र आर्द्रा (12:13 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 15:34 से 17:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:49
रात 05:50 तक
तिथि
सप्तमी, 17:29 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 12:13 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:51 – 07:29टालें
उद्वेग07:29 – 09:06टालें
चर09:06 – 10:43सामान्य
लाभ10:43 – 12:20शुभ
अमृत12:20 – 13:57शुभ
काल13:57 – 15:34टालें
शुभ15:34 – 17:12शुभ
रोग17:12 – 18:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:49 – 20:11टालें
लाभ20:11 – 21:34शुभ
उद्वेग21:34 – 22:57टालें
शुभ22:57 – 00:19शुभ
अमृत00:19 – 01:42शुभ
चर01:42 – 03:05सामान्य
रोग03:05 – 04:27टालें
काल04:27 – 05:50टालें

13 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 17:29 तक
शुक्ल अष्टमी 15:24, 14 अप्रैल तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 10:52, 14 अप्रैल तक
योग
अतिगंडअशुभ 13:59 तक
सुकर्मा 11:10, 14 अप्रैल तक
करण
गर 06:32 तक
वणिज 17:29 तक
विष्टि (भद्रा) 04:26, 14 अप्रैल तक
बव 15:24, 14 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मिथुन 05:12, 14 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
10:38
चंद्रास्त
00:48
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
15:34 – 17:12
यमगंड
09:06 – 10:43
गुलिक काल
12:20 – 13:57

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5106:56दिन
सूर्य06:5608:01दिन
शुक्र08:0109:06दिन
बुध09:0610:11दिन
चंद्र10:1111:15दिन
शनि11:1512:20दिन
गुरु12:2013:25दिन
मंगल13:2514:30दिन
सूर्य14:3015:34दिन
शुक्र15:3416:39दिन
बुध16:3917:44दिन
चंद्र17:4418:49दिन
शनि18:4919:44रात
गुरु19:4420:39रात
मंगल20:3921:34रात
सूर्य21:3422:29रात
शुक्र22:2923:24रात
बुध23:2400:19रात
चंद्र00:1901:15रात
शनि01:1502:10रात
गुरु02:1003:05रात
मंगल03:0504:00रात
सूर्य04:0004:55रात
शुक्र04:5505:50रात

अयनांश 24.2381° (लाहिड़ी)। समय लेह (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।