25 अप्रैल 2029 को लेह का चौघड़िया

बुधवार, 25 अप्रैल 2029, लेह, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 अप्रैल 2029 को लेह में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (06:37 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (12:49 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 18:58
रात 05:35 तक
तिथि
द्वादशी, 03:22 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 12:49 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:36 – 07:17शुभ
अमृत07:17 – 08:57शुभ
काल08:57 – 10:37टालें
शुभ10:37 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:58टालें
उद्वेग13:58 – 15:38टालें
चर15:38 – 17:18सामान्य
लाभ17:18 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:58 – 20:18टालें
शुभ20:18 – 21:38शुभ
अमृत21:38 – 22:57शुभ
चर22:57 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:36टालें
काल01:36 – 02:56टालें
लाभ02:56 – 04:16शुभ
उद्वेग04:16 – 05:35टालें

25 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 06:37 तक
शुक्ल द्वादशी 03:22, 26 अप्रैल तक
शुक्ल त्रयोदशी 23:44, 26 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 10:13, 26 अप्रैल तक
योग
ध्रुव 16:12 तक
व्याघातअशुभ 12:15, 26 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:37 तक
बव 17:03 तक
बालव 03:22, 26 अप्रैल तक
कौलव 13:35, 26 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सिंह 18:13 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
15:35
चंद्रास्त
03:07
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:58
यमगंड
07:17 – 08:57
गुलिक काल
10:37 – 12:17

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3606:43दिन
चंद्र06:4307:50दिन
शनि07:5008:57दिन
गुरु08:5710:04दिन
मंगल10:0411:11दिन
सूर्य11:1112:17दिन
शुक्र12:1713:24दिन
बुध13:2414:31दिन
चंद्र14:3115:38दिन
शनि15:3816:45दिन
गुरु16:4517:52दिन
मंगल17:5218:58दिन
सूर्य18:5819:52रात
शुक्र19:5220:45रात
बुध20:4521:38रात
चंद्र21:3822:31रात
शनि22:3123:24रात
गुरु23:2400:17रात
मंगल00:1701:10रात
सूर्य01:1002:03रात
शुक्र02:0302:56रात
बुध02:5603:49रात
चंद्र03:4904:42रात
शनि04:4205:35रात

अयनांश 24.2665° (लाहिड़ी)। समय लेह (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।