26 अक्टूबर 2044 को पटना का चौघड़िया

बुधवार, 26 अक्टूबर 2044, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 26 अक्टूबर 2044 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (10:38 तक), नक्षत्र मूल (19:28 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 11:33 से 12:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:12
रात 05:54 तक
तिथि
पंचमी, 10:38 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 19:28 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अक्टूबर 2044 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:54 – 07:18शुभ
अमृत07:18 – 08:43शुभ
काल08:43 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:33शुभ
रोग11:33 – 12:57टालें
उद्वेग12:57 – 14:22टालें
चर14:22 – 15:47सामान्य
लाभ15:47 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:12 – 18:47टालें
शुभ18:47 – 20:22शुभ
अमृत20:22 – 21:58शुभ
चर21:58 – 23:33सामान्य
रोग23:33 – 01:08टालें
काल01:08 – 02:44टालें
लाभ02:44 – 04:19शुभ
उद्वेग04:19 – 05:54टालें

26 अक्टूबर 2044 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 10:38 तक
शुक्ल षष्ठी 13:06, 27 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 19:28 तक
पूर्वाषाढ़ा 22:28, 27 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 14:32 तक
सुकर्मा 15:25, 27 अक्टू॰ तक
करण
बालव 10:38 तक
कौलव 23:51 तक
तैतिल 13:06, 27 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
10:43
चंद्रास्त
21:07
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:33 – 12:57
यमगंड
07:18 – 08:43
गुलिक काल
10:08 – 11:33

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5406:50दिन
चंद्र06:5007:47दिन
शनि07:4708:43दिन
गुरु08:4309:40दिन
मंगल09:4010:36दिन
सूर्य10:3611:33दिन
शुक्र11:3312:29दिन
बुध12:2913:26दिन
चंद्र13:2614:22दिन
शनि14:2215:19दिन
गुरु15:1916:15दिन
मंगल16:1517:12दिन
सूर्य17:1218:15रात
शुक्र18:1519:19रात
बुध19:1920:22रात
चंद्र20:2221:26रात
शनि21:2622:29रात
गुरु22:2923:33रात
मंगल23:3300:37रात
सूर्य00:3701:40रात
शुक्र01:4002:44रात
बुध02:4403:47रात
चंद्र03:4704:51रात
शनि04:5105:54रात

अयनांश 24.4832° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।