6 अक्टूबर 2027 को प्रयागराज का चौघड़िया

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027, प्रयागराज, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027 को प्रयागराज में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (04:13, 7 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (04:28, 7 अक्टू॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 11:50 से 13:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:44
रात 05:57 तक
तिथि
सप्तमी, 04:13 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मूल, 04:28 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:56 – 07:25शुभ
अमृत07:25 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:22टालें
शुभ10:22 – 11:50शुभ
रोग11:50 – 13:19टालें
उद्वेग13:19 – 14:47टालें
चर14:47 – 16:16सामान्य
लाभ16:16 – 17:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:44 – 19:16टालें
शुभ19:16 – 20:47शुभ
अमृत20:47 – 22:19शुभ
चर22:19 – 23:50सामान्य
रोग23:50 – 01:22टालें
काल01:22 – 02:54टालें
लाभ02:54 – 04:25शुभ
उद्वेग04:25 – 05:57टालें

6 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 04:13, 7 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 06:28, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 04:28, 7 अक्टू॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 07:14, 8 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 11:38 तक
शोभन 12:03, 7 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:18 तक
वणिज 04:13, 7 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:17, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
11:56
चंद्रास्त
22:27
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:14 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:50 – 13:19
यमगंड
07:25 – 08:53
गुलिक काल
10:22 – 11:50

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5606:55दिन
चंद्र06:5507:54दिन
शनि07:5408:53दिन
गुरु08:5309:52दिन
मंगल09:5210:51दिन
सूर्य10:5111:50दिन
शुक्र11:5012:49दिन
बुध12:4913:48दिन
चंद्र13:4814:47दिन
शनि14:4715:46दिन
गुरु15:4616:45दिन
मंगल16:4517:44दिन
सूर्य17:4418:45रात
शुक्र18:4519:46रात
बुध19:4620:47रात
चंद्र20:4721:48रात
शनि21:4822:49रात
गुरु22:4923:50रात
मंगल23:5000:51रात
सूर्य00:5101:52रात
शुक्र01:5202:54रात
बुध02:5403:55रात
चंद्र03:5504:56रात
शनि04:5605:57रात

अयनांश 24.2449° (लाहिड़ी)। समय प्रयागराज (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।