3 नवंबर 2027 को श्रीनगर का चौघड़िया

बुधवार, 3 नवंबर 2027, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 3 नवंबर 2027 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (19:32 तक), नक्षत्र मूल (12:57 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:51 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 12:14 से 13:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:51 – 17:36
रात 06:52 तक
तिथि
पंचमी, 19:32 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 12:57 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:51 – 08:12शुभ
अमृत08:12 – 09:32शुभ
काल09:32 – 10:53टालें
शुभ10:53 – 12:14शुभ
रोग12:14 – 13:34टालें
उद्वेग13:34 – 14:55टालें
चर14:55 – 16:15सामान्य
लाभ16:15 – 17:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:36 – 19:16टालें
शुभ19:16 – 20:55शुभ
अमृत20:55 – 22:35शुभ
चर22:35 – 00:14सामान्य
रोग00:14 – 01:54टालें
काल01:54 – 03:33टालें
लाभ03:33 – 05:13शुभ
उद्वेग05:13 – 06:52टालें

3 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 19:32 तक
शुक्ल षष्ठी 21:38, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 12:57 तक
पूर्वाषाढ़ा 15:25, 4 नव॰ तक
योग
सुकर्मा 19:30 तक
धृति 20:02, 4 नव॰ तक
करण
बालव 19:32 तक
कौलव 08:31, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:51
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
11:28
चंद्रास्त
21:18
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:14 – 13:34
यमगंड
08:12 – 09:32
गुलिक काल
10:53 – 12:14

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5107:45दिन
चंद्र07:4508:39दिन
शनि08:3909:32दिन
गुरु09:3210:26दिन
मंगल10:2611:20दिन
सूर्य11:2012:14दिन
शुक्र12:1413:07दिन
बुध13:0714:01दिन
चंद्र14:0114:55दिन
शनि14:5515:49दिन
गुरु15:4916:42दिन
मंगल16:4217:36दिन
सूर्य17:3618:42रात
शुक्र18:4219:49रात
बुध19:4920:55रात
चंद्र20:5522:01रात
शनि22:0123:08रात
गुरु23:0800:14रात
मंगल00:1401:20रात
सूर्य01:2002:27रात
शुक्र02:2703:33रात
बुध03:3304:39रात
चंद्र04:3905:46रात
शनि05:4606:52रात

अयनांश 24.2459° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।