16 मई 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 16 मई 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 मई 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (05:14, 17 मई तक), नक्षत्र मूल (16:07 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 10:14 से 11:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:36
रात 05:12 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
मूल, 16:07 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:12 – 06:53सामान्य
लाभ06:53 – 08:33शुभ
अमृत08:33 – 10:14शुभ
काल10:14 – 11:54टालें
शुभ11:54 – 13:35शुभ
रोग13:35 – 15:15टालें
उद्वेग15:15 – 16:55टालें
चर16:55 – 18:36सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:36 – 19:55टालें
काल19:55 – 21:15टालें
लाभ21:15 – 22:34शुभ
उद्वेग22:34 – 23:54टालें
शुभ23:54 – 01:13शुभ
अमृत01:13 – 02:33शुभ
चर02:33 – 03:52सामान्य
रोग03:52 – 05:12टालें

16 मई 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 05:14, 17 मई तक
नक्षत्र
मूल 16:07 तक
पूर्वाषाढ़ा 17:44, 17 मई तक
योग
सिद्ध 07:14 तक
साध्य 07:08, 17 मई तक
करण
बव 16:41 तक
बालव 05:14, 17 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
22:06
चंद्रास्त
07:36
दिनमान
13h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
10:14 – 11:54
यमगंड
15:15 – 16:55
गुलिक काल
06:53 – 08:33

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1206:19दिन
बुध06:1907:26दिन
चंद्र07:2608:33दिन
शनि08:3309:40दिन
गुरु09:4010:47दिन
मंगल10:4711:54दिन
सूर्य11:5413:01दिन
शुक्र13:0114:08दिन
बुध14:0815:15दिन
चंद्र15:1516:22दिन
शनि16:2217:29दिन
गुरु17:2918:36दिन
मंगल18:3619:29रात
सूर्य19:2920:22रात
शुक्र20:2221:15रात
बुध21:1522:08रात
चंद्र22:0823:01रात
शनि23:0123:54रात
गुरु23:5400:47रात
मंगल00:4701:40रात
सूर्य01:4002:33रात
शुक्र02:3303:26रात
बुध03:2604:19रात
चंद्र04:1905:12रात

अयनांश 24.2115° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।