12 मार्च 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

गुरुवार, 12 मार्च 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 12 मार्च 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (06:29, 13 मार्च तक), नक्षत्र मूल (00:43, 13 मार्च तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:10 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 13:37 से 15:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:10 – 18:05
रात 06:09 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
मूल, 00:43 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:10 – 07:40शुभ
रोग07:40 – 09:09टालें
उद्वेग09:09 – 10:38टालें
चर10:38 – 12:08सामान्य
लाभ12:08 – 13:37शुभ
अमृत13:37 – 15:06शुभ
काल15:06 – 16:36टालें
शुभ16:36 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:05 – 19:35शुभ
चर19:35 – 21:06सामान्य
रोग21:06 – 22:37टालें
काल22:37 – 00:07टालें
लाभ00:07 – 01:38शुभ
उद्वेग01:38 – 03:08टालें
शुभ03:08 – 04:39शुभ
अमृत04:39 – 06:09शुभ

12 मार्च 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 06:29, 13 मार्च तक
नक्षत्र
मूल 00:43, 13 मार्च तक
पूर्वाषाढ़ा 03:03, 14 मार्च तक
योग
सिद्धि 09:58 तक
व्यतीपातअशुभ 10:31, 13 मार्च तक
करण
तैतिल 17:27 तक
गर 06:29, 13 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:10
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
01:21
चंद्रास्त
11:43
दिनमान
11h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
13:37 – 15:06
यमगंड
06:10 – 07:40
गुलिक काल
09:09 – 10:38

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1007:10दिन
मंगल07:1008:09दिन
सूर्य08:0909:09दिन
शुक्र09:0910:08दिन
बुध10:0811:08दिन
चंद्र11:0812:08दिन
शनि12:0813:07दिन
गुरु13:0714:07दिन
मंगल14:0715:06दिन
सूर्य15:0616:06दिन
शुक्र16:0617:05दिन
बुध17:0518:05दिन
चंद्र18:0519:05रात
शनि19:0520:06रात
गुरु20:0621:06रात
मंगल21:0622:06रात
सूर्य22:0623:07रात
शुक्र23:0700:07रात
बुध00:0701:07रात
चंद्र01:0702:08रात
शनि02:0803:08रात
गुरु03:0804:08रात
मंगल04:0805:09रात
सूर्य05:0906:09रात

अयनांश 24.2229° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।