21 जून 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 21 जून 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 21 जून 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (15:21 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (09:31 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:08 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 17:08 से 18:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:08 – 18:51
रात 05:08 तक
तिथि
सप्तमी, 15:21 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:08 – 06:51टालें
चर06:51 – 08:34सामान्य
लाभ08:34 – 10:16शुभ
अमृत10:16 – 11:59शुभ
काल11:59 – 13:42टालें
शुभ13:42 – 15:25शुभ
रोग15:25 – 17:08टालें
उद्वेग17:08 – 18:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:51 – 20:08शुभ
अमृत20:08 – 21:25शुभ
चर21:25 – 22:42सामान्य
रोग22:42 – 23:59टालें
काल23:59 – 01:17टालें
लाभ01:17 – 02:34शुभ
उद्वेग02:34 – 03:51टालें
शुभ03:51 – 05:08शुभ

21 जून 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 15:21 तक
शुक्ल अष्टमी 15:40, 22 जून तक
नक्षत्र
योग
सिद्धि 11:21 तक
व्यतीपातअशुभ 10:31, 22 जून तक
करण
वणिज 15:21 तक
विष्टि (भद्रा) 03:25, 22 जून तक
बव 15:40, 22 जून तक
चंद्र राशि
सिंह 15:40 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:08
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
11:25
चंद्रास्त
23:45
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
17:08 – 18:51
यमगंड
11:59 – 13:42
गुलिक काल
15:25 – 17:08

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0806:16दिन
शुक्र06:1607:25दिन
बुध07:2508:34दिन
चंद्र08:3409:42दिन
शनि09:4210:51दिन
गुरु10:5111:59दिन
मंगल11:5913:08दिन
सूर्य13:0814:17दिन
शुक्र14:1715:25दिन
बुध15:2516:34दिन
चंद्र16:3417:42दिन
शनि17:4218:51दिन
गुरु18:5119:42रात
मंगल19:4220:34रात
सूर्य20:3421:25रात
शुक्र21:2522:17रात
बुध22:1723:08रात
चंद्र23:0823:59रात
शनि23:5900:51रात
गुरु00:5101:42रात
मंगल01:4202:34रात
सूर्य02:3403:25रात
शुक्र03:2504:17रात
बुध04:1705:08रात

अयनांश 24.2268° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।