18 सितंबर 2028 को वाराणसी का चौघड़िया

सोमवार, 18 सितंबर 2028, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 18 सितंबर 2028 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (23:53 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (15:23 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 07:16 से 08:48 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 17:58
रात 05:45 तक
तिथि
अमावस्या, 23:53 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 15:23 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:45 – 07:16शुभ
काल07:16 – 08:48टालें
शुभ08:48 – 10:20शुभ
रोग10:20 – 11:51टालें
उद्वेग11:51 – 13:23टालें
चर13:23 – 14:55सामान्य
लाभ14:55 – 16:26शुभ
अमृत16:26 – 17:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:58 – 19:27सामान्य
रोग19:27 – 20:55टालें
काल20:55 – 22:23टालें
लाभ22:23 – 23:52शुभ
उद्वेग23:52 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:48शुभ
अमृत02:48 – 04:17शुभ
चर04:17 – 05:45सामान्य

18 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 23:53 तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:00, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 12:17, 19 सित॰ तक
योग
साध्य 07:53 तक
शुभ 03:32, 19 सित॰ तक
शुक्ल 23:13, 19 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 13:51 तक
नाग 23:53 तक
किंस्तुघ्न 09:56, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 20:36 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
05:00
चंद्रास्त
17:28
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
07:16 – 08:48
यमगंड
10:20 – 11:51
गुलिक काल
13:23 – 14:55

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4506:46दिन
शनि06:4607:47दिन
गुरु07:4708:48दिन
मंगल08:4809:49दिन
सूर्य09:4910:50दिन
शुक्र10:5011:51दिन
बुध11:5112:53दिन
चंद्र12:5313:54दिन
शनि13:5414:55दिन
गुरु14:5515:56दिन
मंगल15:5616:57दिन
सूर्य16:5717:58दिन
शुक्र17:5818:57रात
बुध18:5719:56रात
चंद्र19:5620:55रात
शनि20:5521:54रात
गुरु21:5422:53रात
मंगल22:5323:52रात
सूर्य23:5200:51रात
शुक्र00:5101:49रात
बुध01:4902:48रात
चंद्र02:4803:47रात
शनि03:4704:46रात
गुरु04:4605:45रात

अयनांश 24.2582° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।