11 अक्टूबर 2028 को वाराणसी का चौघड़िया

बुधवार, 11 अक्टूबर 2028, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 अक्टूबर 2028 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:55, 12 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (09:29 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 11:44 से 13:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:34
रात 05:55 तक
तिथि
अष्टमी, 04:55 तक
नवमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 09:29 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:54 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 08:49शुभ
काल08:49 – 10:17टालें
शुभ10:17 – 11:44शुभ
रोग11:44 – 13:12टालें
उद्वेग13:12 – 14:39टालें
चर14:39 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:34 – 19:07टालें
शुभ19:07 – 20:39शुभ
अमृत20:39 – 22:12शुभ
चर22:12 – 23:44सामान्य
रोग23:44 – 01:17टालें
काल01:17 – 02:49टालें
लाभ02:49 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:55टालें

11 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:55, 12 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 03:23, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:11, 12 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 08:12 तक
शिव 06:19, 12 अक्टू॰ तक
करण
बालव 17:26 तक
कौलव 04:55, 12 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:14, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 03:19, 12 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
23:28
चंद्रास्त
12:30
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:21 – 12:07 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:44 – 13:12
यमगंड
07:22 – 08:49
गुलिक काल
10:17 – 11:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5406:53दिन
चंद्र06:5307:51दिन
शनि07:5108:49दिन
गुरु08:4909:47दिन
मंगल09:4710:46दिन
सूर्य10:4611:44दिन
शुक्र11:4412:42दिन
बुध12:4213:41दिन
चंद्र13:4114:39दिन
शनि14:3915:37दिन
गुरु15:3716:36दिन
मंगल16:3617:34दिन
सूर्य17:3418:36रात
शुक्र18:3619:37रात
बुध19:3720:39रात
चंद्र20:3921:41रात
शनि21:4122:43रात
गुरु22:4323:44रात
मंगल23:4400:46रात
सूर्य00:4601:48रात
शुक्र01:4802:49रात
बुध02:4903:51रात
चंद्र03:5104:53रात
शनि04:5305:55रात

अयनांश 24.2590° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।