26 नवंबर 2028 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 26 नवंबर 2028, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 नवंबर 2028 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (23:59 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (08:58 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 15:47 से 17:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:07
रात 06:23 तक
तिथि
दशमी, 23:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:23 – 07:43टालें
चर07:43 – 09:04सामान्य
लाभ09:04 – 10:24शुभ
अमृत10:24 – 11:45शुभ
काल11:45 – 13:05टालें
शुभ13:05 – 14:26शुभ
रोग14:26 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:07 – 18:47शुभ
अमृत18:47 – 20:26शुभ
चर20:26 – 22:06सामान्य
रोग22:06 – 23:45टालें
काल23:45 – 01:25टालें
लाभ01:25 – 03:04शुभ
उद्वेग03:04 – 04:44टालें
शुभ04:44 – 06:23शुभ

26 नवंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 23:59 तक
शुक्ल एकादशी 02:18, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 11:51, 27 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 21:07 तक
सिद्धि 21:49, 27 नव॰ तक
करण
तैतिल 10:45 तक
गर 23:59 तक
वणिज 13:11, 27 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
13:18
चंद्रास्त
01:09
दिनमान
10h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:06

अशुभ समय

राहुकाल
15:47 – 17:07
यमगंड
11:45 – 13:05
गुलिक काल
14:26 – 15:47

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2307:16दिन
शुक्र07:1608:10दिन
बुध08:1009:04दिन
चंद्र09:0409:58दिन
शनि09:5810:51दिन
गुरु10:5111:45दिन
मंगल11:4512:39दिन
सूर्य12:3913:32दिन
शुक्र13:3214:26दिन
बुध14:2615:20दिन
चंद्र15:2016:13दिन
शनि16:1317:07दिन
गुरु17:0718:13रात
मंगल18:1319:20रात
सूर्य19:2020:26रात
शुक्र20:2621:33रात
बुध21:3322:39रात
चंद्र22:3923:45रात
शनि23:4500:52रात
गुरु00:5201:58रात
मंगल01:5803:04रात
सूर्य03:0404:11रात
शुक्र04:1105:17रात
बुध05:1706:23रात

अयनांश 24.2608° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।