30 सितंबर 2025 को वारंगल का चौघड़िया

मंगलवार, 30 सितंबर 2025, वारंगल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 30 सितंबर 2025 को वारंगल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (18:06 तक), नक्षत्र मूल (06:17 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 15:01 से 16:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:01
रात 06:02 तक
तिथि
अष्टमी, 18:06 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:01 – 07:31टालें
उद्वेग07:31 – 09:01टालें
चर09:01 – 10:31सामान्य
लाभ10:31 – 12:01शुभ
अमृत12:01 – 13:31शुभ
काल13:31 – 15:01टालें
शुभ15:01 – 16:31शुभ
रोग16:31 – 18:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:01 – 19:31टालें
लाभ19:31 – 21:01शुभ
उद्वेग21:01 – 22:31टालें
शुभ22:31 – 00:01शुभ
अमृत00:01 – 01:31शुभ
चर01:31 – 03:01सामान्य
रोग03:01 – 04:31टालें
काल04:31 – 06:02टालें

30 सितंबर 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 18:06 तक
शुक्ल नवमी 19:01, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 06:17 तक
पूर्वाषाढ़ा 08:06, 1 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 01:03, 1 अक्टू॰ तक
अतिगंडअशुभ 00:33, 2 अक्टू॰ तक
करण
बव 18:06 तक
बालव 06:39, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
13:04
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
15:01 – 16:31
यमगंड
09:01 – 10:31
गुलिक काल
12:01 – 13:31

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0107:01दिन
सूर्य07:0108:01दिन
शुक्र08:0109:01दिन
बुध09:0110:01दिन
चंद्र10:0111:01दिन
शनि11:0112:01दिन
गुरु12:0113:01दिन
मंगल13:0114:01दिन
सूर्य14:0115:01दिन
शुक्र15:0116:01दिन
बुध16:0117:01दिन
चंद्र17:0118:01दिन
शनि18:0119:01रात
गुरु19:0120:01रात
मंगल20:0121:01रात
सूर्य21:0122:01रात
शुक्र22:0123:01रात
बुध23:0100:01रात
चंद्र00:0101:01रात
शनि01:0102:01रात
गुरु02:0103:01रात
मंगल03:0104:01रात
सूर्य04:0105:02रात
शुक्र05:0206:02रात

अयनांश 24.2167° (लाहिड़ी)। समय वारंगल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।