दुर्गा पूजा 2025 — जूनागढ़
दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा पर्व है, जो महिषासुर पर मां दुर्गा की विजय और अपनी संतानों के साथ हर वर्ष अपने मायके आने का उत्सव है। मुख्य दिन आश्विन शुक्ल पक्ष में षष्ठी से विजयादशमी तक होते हैं।
2025 में दुर्गा पूजा का पर्व रविवार, 28 सितंबर 2025 से गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 तक है।
महासप्तमी: सोमवार, 29 सितंबर 2025
- शुक्ल सप्तमी प्रारंभ: 28 सित॰ 2025, 14:27
- शुक्ल सप्तमी समाप्त: 29 सित॰ 2025, 16:32
जूनागढ़ के लिए तारीख और समय।
दुर्गा पूजा 2025 के सभी दिन
| तारीख | पर्व / अनुष्ठान | तिथि / समय |
|---|---|---|
| रविवार, 21 सित॰ | महालया / सर्व पितृ अमावस्या | अपराह्न मुहूर्त: 13:53 से 16:19 तक |
| रविवार, 28 सित॰ | महाषष्ठी (बोधन) | शुक्ल षष्ठी: 27 सित॰ 2025, 12:04 से 28 सित॰ 2025, 14:27 तक |
| सोमवार, 29 सित॰ | महासप्तमी | शुक्ल सप्तमी: 28 सित॰ 2025, 14:27 से 29 सित॰ 2025, 16:32 तक |
| मंगलवार, 30 सित॰ | महाअष्टमी | शुक्ल अष्टमी: 29 सित॰ 2025, 16:32 से 30 सित॰ 2025, 18:06 तक |
| बुधवार, 1 अक्टू॰ | महानवमी | शुक्ल नवमी: 30 सित॰ 2025, 18:06 से 1 अक्टू॰ 2025, 19:01 तक |
| गुरुवार, 2 अक्टू॰ | विजयादशमी | शुक्ल दशमी: 1 अक्टू॰ 2025, 19:01 से 2 अक्टू॰ 2025, 19:11 तक |
तारीख कैसे तय होती है
महासप्तमी का पर्व आश्विन की शुक्ल सप्तमी को होता है। दिन इस नियम से तय होता है: सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि (उदया तिथि)। जब तिथि दो दिनों में उस समय को छूती है, तो जिस दिन वह अधिक समय तक व्याप्त रहती है, वही दिन लिया जाता है।
जूनागढ़ के लिए गणना। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रीय परंपराओं में त्योहार की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है; अंतिम निर्णय आपके कुल पुरोहित के पंचांग का ही मान्य है।
कैसे मनाया जाता है
पंडालों और घरों में देवी की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं; सप्तमी की शुरुआत नवपत्रिका स्नान से होती है, अष्टमी पर पुष्पांजलि और संधि पूजा, नवमी पर भव्य भोग, और दशमी पर विवाहित महिलाएं विसर्जन (बिसर्जन) से पहले सिंदूर खेला करती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में दुर्गा पूजा कब है?
2025 में दुर्गा पूजा का पर्व रविवार, 28 सितंबर 2025 से गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 तक है। (जूनागढ़)
दुर्गा पूजा की तारीख अलग-अलग कैलेंडरों में कभी-कभी अलग क्यों दिखती है?
हिंदू त्योहार चंद्र तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, और तिथि घड़ी के अलग-अलग समय पर शुरू और समाप्त होती है। हर त्योहार का एक नियम होता है कि तिथि दिन के किस भाग में होनी चाहिए — सूर्योदय, मध्याह्न, संध्या या मध्यरात्रि। जब तिथि दो दिनों में फैली होती है, तो किसी दूसरे शहर या दूसरी परंपरा के अनुसार नियम लागू करने वाले कैलेंडर अलग दिन पर पहुंच सकते हैं। हम अपना इस्तेमाल किया गया नियम और तिथि का समय दिखाते हैं, ताकि आप खुद जांच सकें।