नामकरण मुहूर्त 2052
2052 में नई दिल्ली के लिए नामकरण संस्कार के 97 शुभ दिन, उन समय-अवधियों के साथ जिनमें सभी शर्तें पूरी होती हैं।
नामकरण संस्कार का अगला मुहूर्त: बुधवार, 3 जनवरी 2052 — 07:14 – 17:36
जनवरी 2052 · 7 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| बुधवार, 3 जन॰ | 07:14 – 17:36 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया |
| गुरुवार, 4 जन॰ | 07:14 – 17:37 नक्षत्र: श्रवण · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
| शुक्रवार, 5 जन॰ | 07:14 – 08:27 नक्षत्र: धनिष्ठा · तिथि: शुक्ल तृतीया |
| सोमवार, 8 जन॰ | 07:14 – 17:40 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
| बुधवार, 17 जन॰ | 07:14 – 12:51 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया |
| सोमवार, 22 जन॰ | 10:47 – 17:51 नक्षत्र: हस्त · तिथि: कृष्ण सप्तमी |
| शुक्रवार, 26 जन॰ | 07:12 – 17:55 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण दशमी |
फ़रवरी 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| गुरुवार, 1 फ़र॰ | 07:09 – 18:00 नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| शुक्रवार, 2 फ़र॰ | 07:08 – 18:00 नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा · तिथि: शुक्ल द्वितीया |
| सोमवार, 5 फ़र॰ | 07:07 – 16:05 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल पंचमी |
| शुक्रवार, 9 फ़र॰ | 08:07 – 18:06 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल दशमी |
| सोमवार, 12 फ़र॰ | 07:02 – 18:08 नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी |
| सोमवार, 19 फ़र॰ | 06:56 – 18:13 नक्षत्र: चित्रा · तिथि: कृष्ण पंचमी |
| बुधवार, 21 फ़र॰ | 08:20 – 09:11 नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण सप्तमी |
| बुधवार, 28 फ़र॰ | 06:47 – 16:29 नक्षत्र: श्रवण · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी |
मार्च 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| शुक्रवार, 1 मार्च | 13:05 – 18:21 नक्षत्र: शतभिषा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| गुरुवार, 7 मार्च | 07:40 – 18:25 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
| सोमवार, 11 मार्च | 06:34 – 18:27 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: शुक्ल एकादशी, शुक्ल द्वादशी |
| शुक्रवार, 15 मार्च | 15:24 – 18:29 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा |
| सोमवार, 18 मार्च | 06:26 – 18:31 नक्षत्र: चित्रा, स्वाति · तिथि: कृष्ण तृतीया |
| सोमवार, 25 मार्च | 09:20 – 18:35 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण दशमी |
| बुधवार, 27 मार्च | 06:16 – 18:36 नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी |
| गुरुवार, 28 मार्च | 06:15 – 18:37 नक्षत्र: शतभिषा · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी |
अप्रैल 2052 · 11 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| सोमवार, 1 अप्रैल | 06:10 – 18:39 नक्षत्र: अश्विनी · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
| बुधवार, 3 अप्रैल | 14:50 – 18:40 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल पंचमी |
| गुरुवार, 4 अप्रैल | 06:07 – 08:03 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल पंचमी |
| शुक्रवार, 5 अप्रैल | 06:06 – 11:17 नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
| सोमवार, 8 अप्रैल | 06:02 – 09:53 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: शुक्ल दशमी |
| गुरुवार, 11 अप्रैल | 13:29 – 18:45 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी |
| सोमवार, 15 अप्रैल | 05:55 – 18:47 नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया |
| बुधवार, 17 अप्रैल | 05:53 – 15:22 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण तृतीया |
| बुधवार, 24 अप्रैल | 05:46 – 18:52 नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा · तिथि: कृष्ण दशमी |
| गुरुवार, 25 अप्रैल | 05:45 – 15:01 नक्षत्र: शतभिषा · तिथि: कृष्ण एकादशी |
| शुक्रवार, 26 अप्रैल | 13:37 – 18:53 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी |
मई 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| बुधवार, 1 मई | 05:40 – 18:56 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल तृतीया |
| गुरुवार, 9 मई | 05:34 – 19:01 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल एकादशी, शुक्ल द्वादशी |
| शुक्रवार, 10 मई | 05:33 – 19:02 नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी |
| बुधवार, 15 मई | 05:30 – 12:00 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण द्वितीया |
| सोमवार, 20 मई | 11:31 – 19:08 नक्षत्र: श्रवण · तिथि: कृष्ण सप्तमी |
| शुक्रवार, 24 मई | 05:25 – 19:10 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी |
| बुधवार, 29 मई | 05:24 – 19:13 नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया |
| शुक्रवार, 31 मई | 05:23 – 05:49 नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल तृतीया |
जून 2052 · 7 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| गुरुवार, 6 जून | 05:23 – 19:17 नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल दशमी |
| शुक्रवार, 7 जून | 05:22 – 19:17 नक्षत्र: हस्त, चित्रा · तिथि: शुक्ल एकादशी |
| सोमवार, 17 जून | 05:23 – 19:21 नक्षत्र: धनिष्ठा · तिथि: कृष्ण पंचमी |
| बुधवार, 19 जून | 05:23 – 05:56 नक्षत्र: शतभिषा · तिथि: कृष्ण सप्तमी |
| शुक्रवार, 21 जून | 18:13 – 19:22 नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण दशमी |
| गुरुवार, 27 जून | 13:27 – 19:22 नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| शुक्रवार, 28 जून | 05:26 – 19:23 नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
जुलाई 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| बुधवार, 3 जुल॰ | 05:28 – 13:44 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
| शुक्रवार, 5 जुल॰ | 17:32 – 19:22 नक्षत्र: स्वाति · तिथि: शुक्ल दशमी |
| सोमवार, 8 जुल॰ | 05:30 – 19:22 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल द्वादशी |
| शुक्रवार, 12 जुल॰ | 07:33 – 19:21 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा |
| सोमवार, 15 जुल॰ | 05:33 – 07:22 नक्षत्र: धनिष्ठा · तिथि: कृष्ण तृतीया |
| गुरुवार, 18 जुल॰ | 05:35 – 19:19 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: कृष्ण सप्तमी |
| सोमवार, 22 जुल॰ | 05:39 – 19:17 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी |
| शुक्रवार, 26 जुल॰ | 07:01 – 19:15 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
अगस्त 2052 · 12 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| गुरुवार, 1 अग॰ | 05:43 – 19:11 नक्षत्र: चित्रा · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
| सोमवार, 5 अग॰ | 05:45 – 08:05 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल दशमी |
| गुरुवार, 8 अग॰ | 14:57 – 17:39 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी |
| सोमवार, 12 अग॰ | 05:49 – 17:29 नक्षत्र: शतभिषा · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया |
| बुधवार, 14 अग॰ | 14:49 – 19:00 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: कृष्ण पंचमी |
| गुरुवार, 15 अग॰ | 05:50 – 13:11 नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण पंचमी |
| सोमवार, 19 अग॰ | 05:52 – 18:56 नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: कृष्ण दशमी |
| बुधवार, 21 अग॰ | 07:01 – 18:54 नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: कृष्ण द्वादशी |
| गुरुवार, 22 अग॰ | 05:54 – 18:53 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी |
| सोमवार, 26 अग॰ | 05:56 – 18:48 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
| बुधवार, 28 अग॰ | 17:13 – 18:46 नक्षत्र: चित्रा · तिथि: शुक्ल पंचमी |
| गुरुवार, 29 अग॰ | 05:58 – 18:45 नक्षत्र: चित्रा, स्वाति · तिथि: शुक्ल पंचमी |
सितंबर 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| गुरुवार, 5 सित॰ | 06:01 – 18:37 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल एकादशी, शुक्ल द्वादशी |
| शुक्रवार, 6 सित॰ | 06:01 – 18:36 नक्षत्र: श्रवण · तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी |
| बुधवार, 11 सित॰ | 06:04 – 18:30 नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण तृतीया |
| बुधवार, 18 सित॰ | 06:07 – 18:22 नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी |
| गुरुवार, 19 सित॰ | 06:08 – 11:16 नक्षत्र: पुष्य · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी |
| सोमवार, 23 सित॰ | 06:10 – 18:16 नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| बुधवार, 25 सित॰ | 06:11 – 18:13 नक्षत्र: चित्रा, स्वाति · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
| गुरुवार, 26 सित॰ | 06:11 – 08:39 नक्षत्र: स्वाति · तिथि: शुक्ल तृतीया |
अक्टूबर 2052 · 6 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| गुरुवार, 3 अक्टू॰ | 06:15 – 18:04 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, श्रवण · तिथि: शुक्ल दशमी |
| शुक्रवार, 4 अक्टू॰ | 06:15 – 18:03 नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा · तिथि: शुक्ल एकादशी |
| बुधवार, 9 अक्टू॰ | 06:18 – 17:57 नक्षत्र: रेवती, अश्विनी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया |
| बुधवार, 23 अक्टू॰ | 06:27 – 17:43 नक्षत्र: स्वाति · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| शुक्रवार, 25 अक्टू॰ | 06:28 – 17:41 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल तृतीया |
| बुधवार, 30 अक्टू॰ | 06:32 – 12:23 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
नवंबर 2052 · 8 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| शुक्रवार, 1 नव॰ | 14:23 – 17:35 नक्षत्र: धनिष्ठा · तिथि: शुक्ल दशमी |
| सोमवार, 4 नव॰ | 06:35 – 17:33 नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी |
| शुक्रवार, 8 नव॰ | 09:24 – 17:30 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण द्वितीया |
| सोमवार, 11 नव॰ | 06:40 – 09:40 नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: कृष्ण पंचमी |
| सोमवार, 18 नव॰ | 06:46 – 17:26 नक्षत्र: चित्रा · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी |
| गुरुवार, 21 नव॰ | 14:32 – 17:25 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| शुक्रवार, 22 नव॰ | 06:49 – 13:47 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा |
| गुरुवार, 28 नव॰ | 06:54 – 17:23 नक्षत्र: धनिष्ठा · तिथि: शुक्ल सप्तमी |
दिसंबर 2052 · 6 दिन
| तारीख | मुहूर्त |
|---|---|
| सोमवार, 2 दिस॰ | 06:57 – 17:23 नक्षत्र: रेवती · तिथि: शुक्ल एकादशी |
| शुक्रवार, 6 दिस॰ | 12:48 – 17:24 नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा |
| सोमवार, 16 दिस॰ | 07:07 – 17:26 नक्षत्र: चित्रा, स्वाति · तिथि: कृष्ण एकादशी |
| बुधवार, 18 दिस॰ | 16:52 – 17:27 नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी |
| सोमवार, 23 दिस॰ | 07:10 – 17:30 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया |
| गुरुवार, 26 दिस॰ | 07:11 – 17:31 नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा · तिथि: शुक्ल पंचमी |
नई दिल्ली के लिए गणना। समय-अवधियां स्थानीय समय में दिखाई गई हैं; जो अवधि मध्यरात्रि पार करती है, वह उसी दिन की मानी जाती है जिस दिन वह शुरू होती है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है)।
प्रयुक्त नियम
नामकरण संस्कार परंपरागत रूप से जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है, जब अलग से मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। यदि यह बाद में हो, तो स्थिर, चर, मृदु या क्षिप्र नक्षत्र और अच्छी तिथि व वार वाला दिन चुना जाता है, संक्रांति और ग्रहण के दिनों से बचते हुए, और बेहतर है कि सुबह के समय।
- चंद्रमा का नक्षत्र: रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, पुनर्वसु, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती, अश्विनी, पुष्य, हस्त
- तिथि (शुक्ल पक्ष): प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी; (कृष्ण पक्ष): प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- अधिक मास (मलमास) में कोई मुहूर्त नहीं
- संक्रांति और ग्रहण के दिन से बचें
- केवल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच
ये सामान्य रूप से शुभ समय-अवधियां हैं। किसी संस्कार के लिए ज्योतिषी चुने गए क्षण का लग्न और संबंधित व्यक्तियों का तारा बल व चंद्र बल भी देखते हैं — एक ही अवधि किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे की तुलना में अधिक अनुकूल हो सकती है।
ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं किसी अनुभवी ज्योतिषी से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2052 में नामकरण संस्कार के कितने मुहूर्त हैं?
इस पेज पर दिए गए नियमों के अनुसार 2052 में नई दिल्ली के लिए नामकरण संस्कार के 97 शुभ दिन हैं।
नामकरण संस्कार के लिए अगली शुभ तिथि कब है?
अगली शुभ तिथि बुधवार, 3 जनवरी 2052 है, मुहूर्त 07:14 – 17:36।
कुछ महीनों में कोई मुहूर्त क्यों नहीं होता?
मौसमी निषेधों के कारण लंबी अवधियां वर्जित हो जाती हैं: खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में), चातुर्मास, अधिक मास, और वे अवधियां जब शुक्र या गुरु अस्त होते हैं। बचे हुए दिनों में भी उपयुक्त नक्षत्र और तिथि का एक साथ होना ज़रूरी है।