संपत्ति खरीद मुहूर्त 2052

2052 में नई दिल्ली के लिए संपत्ति खरीद के 69 शुभ दिन, उन समय-अवधियों के साथ जिनमें सभी शर्तें पूरी होती हैं।

संपत्ति खरीद का अगला मुहूर्त: गुरुवार, 18 जनवरी 2052 — 07:14 – 07:14 (19 जन॰)

जनवरी 2052 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 18 जन॰
07:14 – 07:14 (19 जन॰)
नक्षत्र: आश्लेषा, मघा · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया, कृष्ण चतुर्थी
शुक्रवार, 19 जन॰
07:14 – 07:14 (20 जन॰)
नक्षत्र: मघा, पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण चतुर्थी
गुरुवार, 25 जन॰
07:12 – 07:12 (26 जन॰)
नक्षत्र: विशाखा, अनुराधा · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
शुक्रवार, 26 जन॰
07:12 – 06:39 (27 जन॰)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी

फ़रवरी 2052 · 5 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 9 फ़र॰
01:00 (10 फ़र॰) – 07:03 (10 फ़र॰)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 15 फ़र॰
06:59 – 06:59 (16 फ़र॰)
नक्षत्र: मघा, पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
शुक्रवार, 16 फ़र॰
06:59 – 23:23
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण द्वितीया
गुरुवार, 22 फ़र॰
06:53 – 06:52 (23 फ़र॰)
नक्षत्र: विशाखा, अनुराधा · तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
शुक्रवार, 23 फ़र॰
06:52 – 15:08
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण अष्टमी, कृष्ण नवमी

मार्च 2052 · 9 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 1 मार्च
18:26 – 06:44 (2 मार्च)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा
गुरुवार, 7 मार्च
06:21 (8 मार्च) – 06:38 (8 मार्च)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल अष्टमी
शुक्रवार, 8 मार्च
06:38 – 05:20 (9 मार्च)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी
गुरुवार, 14 मार्च
06:31 – 06:30 (15 मार्च)
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल चतुर्दशी, पूर्णिमा
शुक्रवार, 15 मार्च
06:30 – 07:11
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: पूर्णिमा
गुरुवार, 21 मार्च
06:23 – 23:00
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण षष्ठी
शुक्रवार, 22 मार्च
01:44 (23 मार्च) – 06:21 (23 मार्च)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण सप्तमी
गुरुवार, 28 मार्च
04:48 (29 मार्च) – 06:14 (29 मार्च)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी, कृष्ण चतुर्दशी
शुक्रवार, 29 मार्च
06:14 – 02:59 (30 मार्च)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या

अप्रैल 2052 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 4 अप्रैल
12:51 – 06:06 (5 अप्रैल)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी
शुक्रवार, 5 अप्रैल
06:06 – 11:17
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल सप्तमी
गुरुवार, 11 अप्रैल
05:59 – 13:29
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
शुक्रवार, 19 अप्रैल
08:44 – 05:50 (20 अप्रैल)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण पंचमी, कृष्ण षष्ठी
गुरुवार, 25 अप्रैल
15:01 – 05:44 (26 अप्रैल)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी
शुक्रवार, 26 अप्रैल
05:44 – 13:37
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण द्वादशी

मई 2052 · 8 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 2 मई
05:39 – 19:23
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल चतुर्थी, शुक्ल पंचमी
शुक्रवार, 3 मई
17:35 – 05:37 (4 मई)
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल षष्ठी
गुरुवार, 16 मई
14:50 – 05:29 (17 मई)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण तृतीया
शुक्रवार, 17 मई
05:29 – 05:28 (18 मई)
नक्षत्र: मूल, पूर्वाषाढ़ा · तिथि: कृष्ण तृतीया, कृष्ण चतुर्थी
गुरुवार, 23 मई
05:26 – 22:49
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
शुक्रवार, 24 मई
21:28 – 05:25 (25 मई)
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण एकादशी
गुरुवार, 30 मई
03:02 (31 मई) – 05:23 (31 मई)
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल तृतीया
शुक्रवार, 31 मई
05:23 – 01:11 (1 जून)
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी

जून 2052 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 13 जून
05:22 – 05:23 (14 जून)
नक्षत्र: मूल, पूर्वाषाढ़ा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
शुक्रवार, 14 जून
05:23 – 01:21 (15 जून)
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया
गुरुवार, 20 जून
05:23 – 05:50
05:11 (21 जून) – 05:24 (21 जून)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद, रेवती · तिथि: कृष्ण अष्टमी, कृष्ण नवमी
शुक्रवार, 21 जून
05:24 – 03:57 (22 जून)
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
गुरुवार, 27 जून
13:27 – 05:26 (28 जून)
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया
शुक्रवार, 28 जून
05:26 – 11:17
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: शुक्ल द्वितीया

जुलाई 2052 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 11 जुल॰
05:31 – 05:32 (12 जुल॰)
नक्षत्र: मूल, पूर्वाषाढ़ा · तिथि: पूर्णिमा
शुक्रवार, 12 जुल॰
05:32 – 07:33
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा · तिथि: पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा
गुरुवार, 18 जुल॰
11:00 – 05:35 (19 जुल॰)
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
शुक्रवार, 19 जुल॰
05:35 – 10:13
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण अष्टमी
गुरुवार, 25 जुल॰
05:39 – 21:13
नक्षत्र: पुनर्वसु · तिथि: कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या
शुक्रवार, 26 जुल॰
19:35 – 05:40 (27 जुल॰)
नक्षत्र: आश्लेषा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया

अगस्त 2052 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 2 अग॰
02:09 (3 अग॰) – 05:44 (3 अग॰)
नक्षत्र: विशाखा · तिथि: शुक्ल अष्टमी
गुरुवार, 8 अग॰
05:46 – 14:57
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
गुरुवार, 15 अग॰
05:50 – 15:36
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण पंचमी, कृष्ण षष्ठी
गुरुवार, 22 अग॰
04:23 (23 अग॰) – 05:54 (23 अग॰)
नक्षत्र: आश्लेषा · तिथि: कृष्ण चतुर्दशी
शुक्रवार, 23 अग॰
05:54 – 05:55 (24 अग॰)
नक्षत्र: आश्लेषा, मघा · तिथि: कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या
शुक्रवार, 30 अग॰
10:15 – 05:59 (31 अग॰)
नक्षत्र: विशाखा · तिथि: शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी

सितंबर 2052 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 19 सित॰
11:16 – 06:08 (20 सित॰)
नक्षत्र: आश्लेषा · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
शुक्रवार, 20 सित॰
06:08 – 06:09 (21 सित॰)
नक्षत्र: आश्लेषा, मघा · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी, कृष्ण चतुर्दशी
गुरुवार, 26 सित॰
18:18 – 06:12 (27 सित॰)
नक्षत्र: विशाखा · तिथि: शुक्ल चतुर्थी
शुक्रवार, 27 सित॰
06:12 – 06:12 (28 सित॰)
नक्षत्र: विशाखा, अनुराधा · तिथि: शुक्ल चतुर्थी, शुक्ल पंचमी

अक्टूबर 2052 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 17 अक्टू॰
06:23 – 06:24 (18 अक्टू॰)
नक्षत्र: आश्लेषा, मघा · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी
शुक्रवार, 18 अक्टू॰
06:24 – 06:24 (19 अक्टू॰)
नक्षत्र: मघा, पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी
गुरुवार, 24 अक्टू॰
06:27 – 06:28 (25 अक्टू॰)
नक्षत्र: विशाखा, अनुराधा · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया
शुक्रवार, 25 अक्टू॰
06:28 – 06:29 (26 अक्टू॰)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी

नवंबर 2052 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 8 नव॰
06:31 (9 नव॰) – 06:39 (9 नव॰)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: कृष्ण तृतीया
गुरुवार, 14 नव॰
06:43 – 06:44 (15 नव॰)
नक्षत्र: मघा, पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
शुक्रवार, 15 नव॰
06:44 – 23:33
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण दशमी
गुरुवार, 21 नव॰
06:48 – 06:49 (22 नव॰)
नक्षत्र: विशाखा, अनुराधा · तिथि: अमावस्या, शुक्ल प्रतिपदा
शुक्रवार, 22 नव॰
06:49 – 13:47
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल प्रतिपदा
शुक्रवार, 29 नव॰
06:04 (30 नव॰) – 06:55 (30 नव॰)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल नवमी

दिसंबर 2052 · 5 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 6 दिस॰
17:33 – 07:01 (7 दिस॰)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
गुरुवार, 12 दिस॰
07:04 – 05:45 (13 दिस॰)
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
गुरुवार, 19 दिस॰
07:08 – 19:52
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण चतुर्दशी
शुक्रवार, 20 दिस॰
22:50 – 07:09 (21 दिस॰)
नक्षत्र: मूल · तिथि: अमावस्या
शुक्रवार, 27 दिस॰
12:37 – 07:12 (28 दिस॰)
नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी

नई दिल्ली के लिए गणना। समय-अवधियां स्थानीय समय में दिखाई गई हैं; जो अवधि मध्यरात्रि पार करती है, वह उसी दिन की मानी जाती है जिस दिन वह शुरू होती है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है)।

प्रयुक्त नियम

ज़मीन, मकान या फ़्लैट खरीदने या उसकी रजिस्ट्री के लिए परंपरागत रूप से गुरुवार या शुक्रवार चुना जाता है, साथ में भूमि क्रय के लिए सुझाए गए नक्षत्रों में से कोई एक। अधिक मास से बचा जाता है।

  • चंद्रमा का नक्षत्र: मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, विशाखा, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती
  • वार: गुरुवार, शुक्रवार
  • अधिक मास (मलमास) में कोई मुहूर्त नहीं

ये सामान्य रूप से शुभ समय-अवधियां हैं। किसी संस्कार के लिए ज्योतिषी चुने गए क्षण का लग्न और संबंधित व्यक्तियों का तारा बल व चंद्र बल भी देखते हैं — एक ही अवधि किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे की तुलना में अधिक अनुकूल हो सकती है।

ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं किसी अनुभवी ज्योतिषी से बात करें।

ज्योतिषी से बात करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2052 में संपत्ति खरीद के कितने मुहूर्त हैं?

इस पेज पर दिए गए नियमों के अनुसार 2052 में नई दिल्ली के लिए संपत्ति खरीद के 69 शुभ दिन हैं।

संपत्ति खरीद के लिए अगली शुभ तिथि कब है?

अगली शुभ तिथि गुरुवार, 18 जनवरी 2052 है, मुहूर्त 07:14 – 07:14 (19 जन॰)।

कुछ महीनों में कोई मुहूर्त क्यों नहीं होता?

मौसमी निषेधों के कारण लंबी अवधियां वर्जित हो जाती हैं: खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में), चातुर्मास, अधिक मास, और वे अवधियां जब शुक्र या गुरु अस्त होते हैं। बचे हुए दिनों में भी उपयुक्त नक्षत्र और तिथि का एक साथ होना ज़रूरी है।