भरणी नक्षत्र

भरणी के देवता धर्म और मृत्यु के स्वामी यम हैं। यह धारण करने और वहन करने का नक्षत्र है — तीव्र, रचनात्मक और ज़िम्मेदार, जिसमें इच्छाएँ और विश्वास दोनों प्रबल होते हैं।

विशेषताएं

  • दृढ़निश्चयी
  • रचनात्मक
  • सत्यवादी
  • तीव्र

अनुकूल करियर

  • कानून और न्याय
  • रचनात्मक कलाएँ
  • आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी)
  • प्रसूति और देखभाल

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1मेष13° 20′ 00″ – 16° 40′ 00″सिंहLi
2मेष16° 40′ 00″ – 20° 00′ 00″कन्याLu
3मेष20° 00′ 00″ – 23° 19′ 59″तुलाLe
4मेष23° 20′ 00″ – 26° 40′ 00″वृश्चिकLo

पिछला: अश्विनी। अगला: कृत्तिका।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

शुक्र। जिनके जन्म के समय चंद्रमा भरणी में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की शुक्र महादशा से शुरू होता है।

भरणी के नाम अक्षर कौन-से हैं?

भरणी के चार पद Li, Lu, Le, Lo अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

भरणी किस गण और नाड़ी का है?

भरणी मनुष्य गण, मध्य नाड़ी और गज योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।