शुक्र (Shukra)

शुक्र असुरों के गुरु और प्रेम, सौंदर्य व सुख-सुविधा के ग्रह हैं। पुरुषों की कुंडली में ये विवाह के मुख्य कारक हैं।

अभी शुक्र तुला 11° 37′ 03″ पर, स्वाति नक्षत्र में है, वक्री गति में।

शुक्र किसका कारक है

  • प्रेम और विवाह
  • कला और सौंदर्य
  • विलासिता और वाहन
  • प्रजनन स्वास्थ्य

जब शुक्र बलवान हो

बलवान शुक्र आकर्षण, कलात्मक प्रतिभा, सुखी वैवाहिक जीवन और सुख-सुविधाएँ देता है।

जब शुक्र कमज़ोर हो

कमज़ोर शुक्र रिश्तों में परेशानी, भोग-विलास में अति या जीवन का आनंद न ले पाने के रूप में दिख सकता है।

हर भाव में शुक्र

रत्न केवल तभी पहनें जब कोई ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली देख ले — कठिन भावों के स्वामी ग्रह का रत्न नुकसान कर सकता है।