दूसरे भाव में शुक्र धन, मधुर आवाज़, अच्छे भोजन का शौक और सौहार्दपूर्ण परिवार देता है।
द्वितीय भाव किसका कारक है
द्वितीय भाव, यानी धन भाव, धन, बचत, परिवार, वाणी, भोजन और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ा है।
शुक्र क्या देता है
शुक्र असुरों के गुरु और प्रेम, सौंदर्य व सुख-सुविधा के ग्रह हैं। पुरुषों की कुंडली में ये विवाह के मुख्य कारक हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: शुक्र उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए शुक्र किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह द्वितीय भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति शुक्र की अपनी महादशा या अंतर्दशा (20 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।