आठवें भाव में शुक्र जीवनसाथी या विरासत से लाभ और सुख-सुविधाओं के साथ लंबी आयु दे सकता है, हालाँकि संबंधों के कुछ पहलू गुप्त या गहन हो सकते हैं।
अष्टम भाव किसका कारक है
अष्टम भाव, यानी आयु भाव, आयु, अचानक होने वाली घटनाएँ, विरासत, शोध, रहस्य और परिवर्तन से जुड़ा है। यह दुःस्थान (कठिन) भाव है, जो बाधाओं से जुड़ा है जो सहनशक्ति बढ़ाती हैं।
शुक्र क्या देता है
शुक्र असुरों के गुरु और प्रेम, सौंदर्य व सुख-सुविधा के ग्रह हैं। पुरुषों की कुंडली में ये विवाह के मुख्य कारक हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: शुक्र उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए शुक्र किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह अष्टम भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति शुक्र की अपनी महादशा या अंतर्दशा (20 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।