दूसरे भाव में चंद्र ऐसा धन देता है जो घटता-बढ़ता है पर फिर सँभल जाता है, साथ ही मधुर वाणी और अच्छे भोजन का शौक देता है। पारिवारिक संबंध भावनात्मक और महत्वपूर्ण होते हैं।
द्वितीय भाव किसका कारक है
द्वितीय भाव, यानी धन भाव, धन, बचत, परिवार, वाणी, भोजन और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ा है।
चंद्र क्या देता है
चंद्रमा मन और भावनाओं के स्वामी हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि और चंद्रमा का नक्षत्र राशिफल, दशा और कुंडली मिलान के केंद्र में होते हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: चंद्र उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए चंद्र किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह द्वितीय भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति चंद्र की अपनी महादशा या अंतर्दशा (10 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।