मृगशिरा नक्षत्र

मृगशिरा, यानी हिरण का सिर, खोज करने वाला नक्षत्र है। यह जिज्ञासा, सौम्यता और विचारों, जगहों व लोगों को जानने की बेचैन इच्छा देता है।

विशेषताएं

  • जिज्ञासु और सौम्य
  • बातूनी
  • बेचैन
  • शोधप्रिय

अनुकूल करियर

  • शोध
  • यात्रा
  • लेखन
  • वस्त्र और इत्र

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1वृषभ23° 20′ 00″ – 26° 40′ 00″सिंहVe
2वृषभ26° 40′ 00″ – 30° 00′ 00″कन्याVo
3मिथुन0° 00′ 00″ – 3° 20′ 00″तुलाKa
4मिथुन3° 20′ 00″ – 6° 40′ 00″वृश्चिकKi

पिछला: रोहिणी। अगला: आर्द्रा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

मंगल। जिनके जन्म के समय चंद्रमा मृगशिरा में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की मंगल महादशा से शुरू होता है।

मृगशिरा के नाम अक्षर कौन-से हैं?

मृगशिरा के चार पद Ve, Vo, Ka, Ki अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

मृगशिरा किस गण और नाड़ी का है?

मृगशिरा देव गण, मध्य नाड़ी और सर्प योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।