रोहिणी नक्षत्र

रोहिणी, जिसके स्वामी चंद्रमा और देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं, चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है। यह सुंदरता, उर्वरता, आकर्षण और सुख-सुविधा व विकास के प्रति प्रेम देता है।

विशेषताएं

  • आकर्षक और कलाप्रेमी
  • स्थिर
  • रसिक
  • अधिकार-भावना वाले

अनुकूल करियर

  • फ़ैशन और सौंदर्य
  • कृषि
  • संगीत और कला
  • आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी)

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1वृषभ10° 00′ 00″ – 13° 20′ 00″मेषO
2वृषभ13° 20′ 00″ – 16° 40′ 00″वृषभVa
3वृषभ16° 39′ 59″ – 20° 00′ 00″मिथुनVi
4वृषभ20° 00′ 00″ – 23° 20′ 00″कर्कVu

पिछला: कृत्तिका। अगला: मृगशिरा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

चंद्र। जिनके जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की चंद्र महादशा से शुरू होता है।

रोहिणी के नाम अक्षर कौन-से हैं?

रोहिणी के चार पद O, Va, Vi, Vu अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

रोहिणी किस गण और नाड़ी का है?

रोहिणी मनुष्य गण, अंत्य नाड़ी और सर्प योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।