13 नवंबर 2027 को आगरा का पंचांग

शनिवार, 13 नवंबर 2027, आगरा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 13 नवंबर 2027 को आगरा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (09:55 तक), नक्षत्र अश्विनी (08:10 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:36 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 09:19 से 10:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:36 – 17:27
रात 06:36 तक
तिथि
चतुर्दशी, 09:55 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
भरणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 09:55 तक
पूर्णिमा 08:55, 14 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 07:52, 14 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 19:58 तक
वरीयान 17:49, 14 नव॰ तक
करण
वणिज 09:55 तक
विष्टि (भद्रा) 21:29 तक
बव 08:55, 14 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
16:38
चंद्रास्त
05:37
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
09:19 – 10:40
यमगंड
13:23 – 14:44
गुलिक काल
06:36 – 07:57

13 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:36 – 07:57टालें
शुभ07:57 – 09:19शुभ
रोग09:19 – 10:40टालें
उद्वेग10:40 – 12:01टालें
चर12:01 – 13:23सामान्य
लाभ13:23 – 14:44शुभ
अमृत14:44 – 16:06शुभ
काल16:06 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:27 – 19:06शुभ
उद्वेग19:06 – 20:45टालें
शुभ20:45 – 22:23शुभ
अमृत22:23 – 00:02शुभ
चर00:02 – 01:41सामान्य
रोग01:41 – 03:19टालें
काल03:19 – 04:58टालें
लाभ04:58 – 06:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3607:30दिन
गुरु07:3008:24दिन
मंगल08:2409:19दिन
सूर्य09:1910:13दिन
शुक्र10:1311:07दिन
बुध11:0712:01दिन
चंद्र12:0112:56दिन
शनि12:5613:50दिन
गुरु13:5014:44दिन
मंगल14:4415:39दिन
सूर्य15:3916:33दिन
शुक्र16:3317:27दिन
बुध17:2718:33रात
चंद्र18:3319:39रात
शनि19:3920:45रात
गुरु20:4521:50रात
मंगल21:5022:56रात
सूर्य22:5600:02रात
शुक्र00:0201:08रात
बुध01:0802:13रात
चंद्र02:1303:19रात
शनि03:1904:25रात
गुरु04:2505:31रात
मंगल05:3106:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां आगरा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2463° (लाहिड़ी)। समय आगरा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।