21 सितंबर 2025 को अमरावती का पंचांग

रविवार, 21 सितंबर 2025, अमरावती, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 21 सितंबर 2025 को अमरावती में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (01:24, 22 सित॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (09:32 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 16:33 से 18:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:04
रात 05:56 तक
तिथि
अमावस्या, 01:24 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 सितंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 01:24, 22 सित॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 02:56, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 11:24, 22 सित॰ तक
योग
शुभ 19:52 तक
शुक्ल 19:58, 22 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 12:47 तक
नाग 01:24, 22 सित॰ तक
किंस्तुघ्न 14:07, 22 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 15:58 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
05:21
चंद्रास्त
17:47
दिनमान
12h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
16:33 – 18:04
यमगंड
12:00 – 13:31
गुलिक काल
15:02 – 16:33

21 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:56 – 07:27टालें
चर07:27 – 08:58सामान्य
लाभ08:58 – 10:29शुभ
अमृत10:29 – 12:00शुभ
काल12:00 – 13:31टालें
शुभ13:31 – 15:02शुभ
रोग15:02 – 16:33टालें
उद्वेग16:33 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:04 – 19:33शुभ
अमृत19:33 – 21:02शुभ
चर21:02 – 22:31सामान्य
रोग22:31 – 00:00टालें
काल00:00 – 01:29टालें
लाभ01:29 – 02:58शुभ
उद्वेग02:58 – 04:27टालें
शुभ04:27 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5606:57दिन
शुक्र06:5707:58दिन
बुध07:5808:58दिन
चंद्र08:5809:59दिन
शनि09:5911:00दिन
गुरु11:0012:00दिन
मंगल12:0013:01दिन
सूर्य13:0114:02दिन
शुक्र14:0215:02दिन
बुध15:0216:03दिन
चंद्र16:0317:04दिन
शनि17:0418:04दिन
गुरु18:0419:04रात
मंगल19:0420:03रात
सूर्य20:0321:02रात
शुक्र21:0222:02रात
बुध22:0223:01रात
चंद्र23:0100:00रात
शनि00:0001:00रात
गुरु01:0001:59रात
मंगल01:5902:58रात
सूर्य02:5803:58रात
शुक्र03:5804:57रात
बुध04:5705:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अमरावती में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2164° (लाहिड़ी)। समय अमरावती (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।