सिंगापुर का आज का पंचांग

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (05:55, 16 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (09:17, 16 अक्टू॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 14:21 से 15:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 18:53
रात 06:47 तक
तिथि
पंचमी, 05:55 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 05:55, 16 अक्टू॰ तक
शुक्ल षष्ठी 08:24, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 09:17, 16 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 23:45 तक
शोभन 00:35, 17 अक्टू॰ तक
करण
बव 16:46 तक
बालव 05:55, 16 अक्टू॰ तक
कौलव 19:08, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
10:15
चंद्रास्त
22:34
दिनमान
12h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:26 – 13:14

अशुभ समय

राहुकाल
14:21 – 15:51
यमगंड
06:48 – 08:18
गुलिक काल
09:49 – 11:19

15 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:48 – 08:18शुभ
रोग08:18 – 09:49टालें
उद्वेग09:49 – 11:19टालें
चर11:19 – 12:50सामान्य
लाभ12:50 – 14:21शुभ
अमृत14:21 – 15:51शुभ
काल15:51 – 17:22टालें
शुभ17:22 – 18:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:53 – 20:22शुभ
चर20:22 – 21:51सामान्य
रोग21:51 – 23:21टालें
काल23:21 – 00:50टालें
लाभ00:50 – 02:19शुभ
उद्वेग02:19 – 03:49टालें
शुभ03:49 – 05:18शुभ
अमृत05:18 – 06:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4807:48दिन
मंगल07:4808:48दिन
सूर्य08:4809:49दिन
शुक्र09:4910:49दिन
बुध10:4911:50दिन
चंद्र11:5012:50दिन
शनि12:5013:50दिन
गुरु13:5014:51दिन
मंगल14:5115:51दिन
सूर्य15:5116:52दिन
शुक्र16:5217:52दिन
बुध17:5218:53दिन
चंद्र18:5319:52रात
शनि19:5220:52रात
गुरु20:5221:51रात
मंगल21:5122:51रात
सूर्य22:5123:50रात
शुक्र23:5000:50रात
बुध00:5001:50रात
चंद्र01:5002:49रात
शनि02:4903:49रात
गुरु03:4904:48रात
मंगल04:4805:48रात
सूर्य05:4806:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2312° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।