4 फ़रवरी 2025 को अयोध्या का पंचांग

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (02:31, 5 फ़र॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (21:49 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 15:00 से 16:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:45
रात 06:44 तक
तिथि
सप्तमी, 02:31 तक
अष्टमी
नक्षत्र
अश्विनी, 21:49 तक
भरणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 02:31, 5 फ़र॰ तक
शुक्ल अष्टमी 00:36, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:33, 5 फ़र॰ तक
योग
शुभ 00:06, 5 फ़र॰ तक
शुक्ल 21:18, 5 फ़र॰ तक
करण
गर 15:33 तक
वणिज 02:31, 5 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:32, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
10:24
चंद्रास्त
23:57
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
15:00 – 16:23
यमगंड
09:30 – 10:52
गुलिक काल
12:15 – 13:37

4 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:44 – 08:07टालें
उद्वेग08:07 – 09:30टालें
चर09:30 – 10:52सामान्य
लाभ10:52 – 12:15शुभ
अमृत12:15 – 13:37शुभ
काल13:37 – 15:00टालें
शुभ15:00 – 16:23शुभ
रोग16:23 – 17:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:45 – 19:22टालें
लाभ19:22 – 21:00शुभ
उद्वेग21:00 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 00:14शुभ
अमृत00:14 – 01:52शुभ
चर01:52 – 03:29सामान्य
रोग03:29 – 05:06टालें
काल05:06 – 06:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4407:39दिन
सूर्य07:3908:34दिन
शुक्र08:3409:30दिन
बुध09:3010:25दिन
चंद्र10:2511:20दिन
शनि11:2012:15दिन
गुरु12:1513:10दिन
मंगल13:1014:05दिन
सूर्य14:0515:00दिन
शुक्र15:0015:55दिन
बुध15:5516:50दिन
चंद्र16:5017:45दिन
शनि17:4518:50रात
गुरु18:5019:55रात
मंगल19:5521:00रात
सूर्य21:0022:05रात
शुक्र22:0523:10रात
बुध23:1000:14रात
चंद्र00:1401:19रात
शनि01:1902:24रात
गुरु02:2403:29रात
मंगल03:2904:34रात
सूर्य04:3405:39रात
शुक्र05:3906:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2076° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।