20 अप्रैल 2025 को अयोध्या का पंचांग

रविवार, 20 अप्रैल 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 अप्रैल 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (19:01 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (11:48 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 16:50 से 18:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:27
रात 05:31 तक
तिथि
सप्तमी, 19:01 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 11:48 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अप्रैल 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:01 तक
कृष्ण अष्टमी 18:59, 21 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:37, 21 अप्रैल तक
योग
सिद्ध 00:12, 21 अप्रैल तक
साध्य 23:00, 21 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:46 तक
बव 19:01 तक
बालव 07:05, 21 अप्रैल तक
चंद्र राशि
धनु 18:04 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
00:17
चंद्रास्त
10:38
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
16:50 – 18:27
यमगंड
12:00 – 13:37
गुलिक काल
15:14 – 16:50

20 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:32 – 07:09टालें
चर07:09 – 08:46सामान्य
लाभ08:46 – 10:23शुभ
अमृत10:23 – 12:00शुभ
काल12:00 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:14शुभ
रोग15:14 – 16:50टालें
उद्वेग16:50 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:27 – 19:50शुभ
अमृत19:50 – 21:13शुभ
चर21:13 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 23:59टालें
काल23:59 – 01:22टालें
लाभ01:22 – 02:45शुभ
उद्वेग02:45 – 04:08टालें
शुभ04:08 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3206:37दिन
शुक्र06:3707:41दिन
बुध07:4108:46दिन
चंद्र08:4609:51दिन
शनि09:5110:55दिन
गुरु10:5512:00दिन
मंगल12:0013:04दिन
सूर्य13:0414:09दिन
शुक्र14:0915:14दिन
बुध15:1416:18दिन
चंद्र16:1817:23दिन
शनि17:2318:27दिन
गुरु18:2719:23रात
मंगल19:2320:18रात
सूर्य20:1821:13रात
शुक्र21:1322:09रात
बुध22:0923:04रात
चंद्र23:0423:59रात
शनि23:5900:55रात
गुरु00:5501:50रात
मंगल01:5002:45रात
सूर्य02:4503:41रात
शुक्र03:4104:36रात
बुध04:3605:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2105° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।