18 अगस्त 2025 को अयोध्या का पंचांग

सोमवार, 18 अगस्त 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 18 अगस्त 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (17:23 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:06, 19 अग॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 07:11 से 08:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 18:35
रात 05:34 तक
तिथि
दशमी, 17:23 तक
एकादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:06 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अगस्त 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 17:23 तक
कृष्ण एकादशी 15:33, 19 अग॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:06, 19 अग॰ तक
आर्द्रा 01:07, 20 अग॰ तक
योग
हर्षण 22:59 तक
वज्रअशुभ 20:29, 19 अग॰ तक
करण
वणिज 06:22 तक
विष्टि (भद्रा) 17:23 तक
बव 04:26, 19 अग॰ तक
बालव 15:33, 19 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:40 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
00:09
चंद्रास्त
14:50
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
07:11 – 08:49
यमगंड
10:27 – 12:04
गुलिक काल
13:42 – 15:20

18 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:34 – 07:11शुभ
काल07:11 – 08:49टालें
शुभ08:49 – 10:27शुभ
रोग10:27 – 12:04टालें
उद्वेग12:04 – 13:42टालें
चर13:42 – 15:20सामान्य
लाभ15:20 – 16:57शुभ
अमृत16:57 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:35 – 19:57सामान्य
रोग19:57 – 21:20टालें
काल21:20 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:05शुभ
उद्वेग00:05 – 01:27टालें
शुभ01:27 – 02:49शुभ
अमृत02:49 – 04:12शुभ
चर04:12 – 05:34सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3406:39दिन
शनि06:3907:44दिन
गुरु07:4408:49दिन
मंगल08:4909:54दिन
सूर्य09:5410:59दिन
शुक्र10:5912:04दिन
बुध12:0413:09दिन
चंद्र13:0914:15दिन
शनि14:1515:20दिन
गुरु15:2016:25दिन
मंगल16:2517:30दिन
सूर्य17:3018:35दिन
शुक्र18:3519:30रात
बुध19:3020:25रात
चंद्र20:2521:20रात
शनि21:2022:15रात
गुरु22:1523:10रात
मंगल23:1000:05रात
सूर्य00:0501:00रात
शुक्र01:0001:55रात
बुध01:5502:49रात
चंद्र02:4903:44रात
शनि03:4404:39रात
गुरु04:3905:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2151° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।