26 अक्टूबर 2025 को अयोध्या का पंचांग

रविवार, 26 अक्टूबर 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 अक्टूबर 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (06:05, 27 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (10:46 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 15:58 से 17:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 17:23
रात 06:07 तक
तिथि
पंचमी, 06:05 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 10:46 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 06:05, 27 अक्टू॰ तक
शुक्ल षष्ठी 08:00, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:27, 27 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 06:45 तक
अतिगंडअशुभ 07:26, 27 अक्टू॰ तक
करण
बव 16:59 तक
बालव 06:05, 27 अक्टू॰ तक
कौलव 19:06, 27 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
10:18
चंद्रास्त
20:32
दिनमान
11h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:22 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
15:58 – 17:23
यमगंड
11:45 – 13:09
गुलिक काल
14:34 – 15:58

26 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:06 – 07:31टालें
चर07:31 – 08:55सामान्य
लाभ08:55 – 10:20शुभ
अमृत10:20 – 11:45शुभ
काल11:45 – 13:09टालें
शुभ13:09 – 14:34शुभ
रोग14:34 – 15:58टालें
उद्वेग15:58 – 17:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:23 – 18:58शुभ
अमृत18:58 – 20:34शुभ
चर20:34 – 22:09सामान्य
रोग22:09 – 23:45टालें
काल23:45 – 01:20टालें
लाभ01:20 – 02:56शुभ
उद्वेग02:56 – 04:32टालें
शुभ04:32 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0607:03दिन
शुक्र07:0307:59दिन
बुध07:5908:55दिन
चंद्र08:5509:52दिन
शनि09:5210:48दिन
गुरु10:4811:45दिन
मंगल11:4512:41दिन
सूर्य12:4113:37दिन
शुक्र13:3714:34दिन
बुध14:3415:30दिन
चंद्र15:3016:26दिन
शनि16:2617:23दिन
गुरु17:2318:26रात
मंगल18:2619:30रात
सूर्य19:3020:34रात
शुक्र20:3421:37रात
बुध21:3722:41रात
चंद्र22:4123:45रात
शनि23:4500:49रात
गुरु00:4901:52रात
मंगल01:5202:56रात
सूर्य02:5604:00रात
शुक्र04:0005:03रात
बुध05:0306:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।