24 नवंबर 2025 को अयोध्या का पंचांग

सोमवार, 24 नवंबर 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 24 नवंबर 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (21:22 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (21:53 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 07:47 से 09:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:08
रात 06:28 तक
तिथि
चतुर्थी, 21:22 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 21:53 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 नवंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 21:22 तक
शुक्ल पंचमी 22:57, 25 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 23:57, 25 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 12:36 तक
गंडअशुभ 12:49, 25 नव॰ तक
करण
वणिज 08:26 तक
विष्टि (भद्रा) 21:22 तक
बव 10:13, 25 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 04:27, 25 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
09:54
चंद्रास्त
20:18
दिनमान
10h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:34
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
07:47 – 09:07
यमगंड
10:27 – 11:47
गुलिक काल
13:07 – 14:27

24 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:27 – 07:47शुभ
काल07:47 – 09:07टालें
शुभ09:07 – 10:27शुभ
रोग10:27 – 11:47टालें
उद्वेग11:47 – 13:07टालें
चर13:07 – 14:27सामान्य
लाभ14:27 – 15:48शुभ
अमृत15:48 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:08 – 18:48सामान्य
रोग18:48 – 20:28टालें
काल20:28 – 22:08टालें
लाभ22:08 – 23:48शुभ
उद्वेग23:48 – 01:28टालें
शुभ01:28 – 03:08शुभ
अमृत03:08 – 04:48शुभ
चर04:48 – 06:28सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2707:20दिन
शनि07:2008:14दिन
गुरु08:1409:07दिन
मंगल09:0710:00दिन
सूर्य10:0010:54दिन
शुक्र10:5411:47दिन
बुध11:4712:41दिन
चंद्र12:4113:34दिन
शनि13:3414:27दिन
गुरु14:2715:21दिन
मंगल15:2116:14दिन
सूर्य16:1417:08दिन
शुक्र17:0818:14रात
बुध18:1419:21रात
चंद्र19:2120:28रात
शनि20:2821:34रात
गुरु21:3422:41रात
मंगल22:4123:48रात
सूर्य23:4800:54रात
शुक्र00:5402:01रात
बुध02:0103:08रात
चंद्र03:0804:14रात
शनि04:1405:21रात
गुरु05:2106:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2188° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।