21 दिसंबर 2026 को अयोध्या का पंचांग

सोमवार, 21 दिसंबर 2026, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (17:36 तक), नक्षत्र भरणी (13:09 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 08:03 से 09:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:12
रात 06:45 तक
तिथि
द्वादशी, 17:36 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
भरणी, 13:09 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 17:36 तक
शुक्ल त्रयोदशी 14:24, 22 दिस॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:09 तक
कृत्तिका 10:45, 22 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 01:32, 22 दिस॰ तक
साध्य 21:32, 22 दिस॰ तक
करण
बव 07:00 तक
बालव 17:36 तक
कौलव 04:04, 22 दिस॰ तक
तैतिल 14:24, 22 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 18:36 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
14:23
चंद्रास्त
03:31
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
08:03 – 09:22
यमगंड
10:40 – 11:59
गुलिक काल
13:17 – 14:35

21 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:45 – 08:03शुभ
काल08:03 – 09:22टालें
शुभ09:22 – 10:40शुभ
रोग10:40 – 11:59टालें
उद्वेग11:59 – 13:17टालें
चर13:17 – 14:35सामान्य
लाभ14:35 – 15:54शुभ
अमृत15:54 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:12 – 18:54सामान्य
रोग18:54 – 20:36टालें
काल20:36 – 22:17टालें
लाभ22:17 – 23:59शुभ
उद्वेग23:59 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:22शुभ
अमृत03:22 – 05:04शुभ
चर05:04 – 06:45सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4507:37दिन
शनि07:3708:30दिन
गुरु08:3009:22दिन
मंगल09:2210:14दिन
सूर्य10:1411:06दिन
शुक्र11:0611:59दिन
बुध11:5912:51दिन
चंद्र12:5113:43दिन
शनि13:4314:35दिन
गुरु14:3515:28दिन
मंगल15:2816:20दिन
सूर्य16:2017:12दिन
शुक्र17:1218:20रात
बुध18:2019:28रात
चंद्र19:2820:36रात
शनि20:3621:43रात
गुरु21:4322:51रात
मंगल22:5123:59रात
सूर्य23:5901:07रात
शुक्र01:0702:14रात
बुध02:1403:22रात
चंद्र03:2204:30रात
शनि04:3005:38रात
गुरु05:3806:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2338° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।