25 अगस्त 2027 को अयोध्या का पंचांग

बुधवार, 25 अगस्त 2027, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 अगस्त 2027 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (19:20 तक), नक्षत्र कृत्तिका (12:28 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:29
रात 05:37 तक
तिथि
अष्टमी, 19:20 तक
नवमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 12:28 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अगस्त 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 19:20 तक
कृष्ण नवमी 17:39, 26 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:42, 26 अग॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 21:49 तक
हर्षण 19:21, 26 अग॰ तक
करण
बालव 07:57 तक
कौलव 19:20 तक
तैतिल 06:34, 26 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
23:20
चंद्रास्त
12:49
दिनमान
12h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:28 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:39
यमगंड
07:13 – 08:50
गुलिक काल
10:26 – 12:03

25 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:37 – 07:13शुभ
अमृत07:13 – 08:50शुभ
काल08:50 – 10:26टालें
शुभ10:26 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:39टालें
उद्वेग13:39 – 15:16टालें
चर15:16 – 16:52सामान्य
लाभ16:52 – 18:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:29 – 19:52टालें
शुभ19:52 – 21:16शुभ
अमृत21:16 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:03सामान्य
रोग00:03 – 01:27टालें
काल01:27 – 02:50टालें
लाभ02:50 – 04:14शुभ
उद्वेग04:14 – 05:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3706:41दिन
चंद्र06:4107:45दिन
शनि07:4508:50दिन
गुरु08:5009:54दिन
मंगल09:5410:58दिन
सूर्य10:5812:03दिन
शुक्र12:0313:07दिन
बुध13:0714:11दिन
चंद्र14:1115:16दिन
शनि15:1616:20दिन
गुरु16:2017:24दिन
मंगल17:2418:29दिन
सूर्य18:2919:24रात
शुक्र19:2420:20रात
बुध20:2021:16रात
चंद्र21:1622:11रात
शनि22:1123:07रात
गुरु23:0700:03रात
मंगल00:0300:59रात
सूर्य00:5901:54रात
शुक्र01:5402:50रात
बुध02:5003:46रात
चंद्र03:4604:42रात
शनि04:4205:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2433° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।