27 अगस्त 2027 को अयोध्या का पंचांग

शुक्रवार, 27 अगस्त 2027, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 अगस्त 2027 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (15:25 तक), नक्षत्र मृगशिरा (10:22 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 10:26 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 18:27
रात 05:38 तक
तिथि
दशमी, 15:25 तक
एकादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 10:22 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अगस्त 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 15:25 तक
कृष्ण एकादशी 12:42, 28 अग॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:32, 28 अग॰ तक
योग
वज्रअशुभ 16:26 तक
सिद्धि 13:07, 28 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:25 तक
बव 02:07, 28 अग॰ तक
बालव 12:42, 28 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
00:20
चंद्रास्त
14:53
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
10:26 – 12:02
यमगंड
15:14 – 16:50
गुलिक काल
07:14 – 08:50

27 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:38 – 07:14सामान्य
लाभ07:14 – 08:50शुभ
अमृत08:50 – 10:26शुभ
काल10:26 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:38शुभ
रोग13:38 – 15:14टालें
उद्वेग15:14 – 16:50टालें
चर16:50 – 18:27सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:27 – 19:51टालें
काल19:51 – 21:14टालें
लाभ21:14 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:02टालें
शुभ00:02 – 01:26शुभ
अमृत01:26 – 02:50शुभ
चर02:50 – 04:14सामान्य
रोग04:14 – 05:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3806:42दिन
बुध06:4207:46दिन
चंद्र07:4608:50दिन
शनि08:5009:54दिन
गुरु09:5410:58दिन
मंगल10:5812:02दिन
सूर्य12:0213:06दिन
शुक्र13:0614:10दिन
बुध14:1015:14दिन
चंद्र15:1416:18दिन
शनि16:1817:22दिन
गुरु17:2218:27दिन
मंगल18:2719:23रात
सूर्य19:2320:18रात
शुक्र20:1821:14रात
बुध21:1422:10रात
चंद्र22:1023:06रात
शनि23:0600:02रात
गुरु00:0200:58रात
मंगल00:5801:54रात
सूर्य01:5402:50रात
शुक्र02:5003:46रात
बुध03:4604:42रात
चंद्र04:4205:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2433° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।