9 अक्टूबर 2027 को अयोध्या का पंचांग

शनिवार, 9 अक्टूबर 2027, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (09:02 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (10:18 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 17:39
रात 05:57 तक
तिथि
नवमी, 09:02 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 10:18 तक
श्रवण
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 09:02 तक
शुक्ल दशमी 11:41, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:25, 10 अक्टू॰ तक
योग
सुकर्मा 13:52 तक
धृति 14:54, 10 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 09:02 तक
तैतिल 22:22 तक
गर 11:41, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
14:04
चंद्रास्त
00:13
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:20
यमगंड
13:16 – 14:43
गुलिक काल
05:57 – 07:25

9 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:57 – 07:25टालें
शुभ07:25 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:20टालें
उद्वेग10:20 – 11:48टालें
चर11:48 – 13:16सामान्य
लाभ13:16 – 14:43शुभ
अमृत14:43 – 16:11शुभ
काल16:11 – 17:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:39 – 19:11शुभ
उद्वेग19:11 – 20:44टालें
शुभ20:44 – 22:16शुभ
अमृत22:16 – 23:48शुभ
चर23:48 – 01:20सामान्य
रोग01:20 – 02:53टालें
काल02:53 – 04:25टालें
लाभ04:25 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5706:55दिन
गुरु06:5507:54दिन
मंगल07:5408:52दिन
सूर्य08:5209:51दिन
शुक्र09:5110:49दिन
बुध10:4911:48दिन
चंद्र11:4812:46दिन
शनि12:4613:45दिन
गुरु13:4514:43दिन
मंगल14:4315:42दिन
सूर्य15:4216:41दिन
शुक्र16:4117:39दिन
बुध17:3918:41रात
चंद्र18:4119:42रात
शनि19:4220:44रात
गुरु20:4421:45रात
मंगल21:4522:47रात
सूर्य22:4723:48रात
शुक्र23:4800:50रात
बुध00:5001:51रात
चंद्र01:5102:53रात
शनि02:5303:54रात
गुरु03:5404:56रात
मंगल04:5605:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2450° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।