11 फ़रवरी 2028 को अयोध्या का पंचांग

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (16:46 तक), नक्षत्र मघा (22:01 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 10:51 से 12:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 17:50
रात 06:40 तक
तिथि
प्रतिपदा, 16:46 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मघा, 22:01 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 16:46 तक
कृष्ण द्वितीया 13:04, 12 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:01 तक
पूर्वा फाल्गुनी 19:09, 12 फ़र॰ तक
योग
शोभन 14:49 तक
अतिगंडअशुभ 10:33, 12 फ़र॰ तक
करण
कौलव 16:46 तक
तैतिल 02:53, 12 फ़र॰ तक
गर 13:04, 12 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
18:48
चंद्रास्त
06:55
दिनमान
11h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
10:51 – 12:15
यमगंड
15:02 – 16:26
गुलिक काल
08:04 – 09:28

11 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:40 – 08:04सामान्य
लाभ08:04 – 09:28शुभ
अमृत09:28 – 10:51शुभ
काल10:51 – 12:15टालें
शुभ12:15 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:26टालें
चर16:26 – 17:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:50 – 19:26टालें
काल19:26 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:15टालें
शुभ00:15 – 01:51शुभ
अमृत01:51 – 03:27शुभ
चर03:27 – 05:03सामान्य
रोग05:03 – 06:40टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4007:36दिन
बुध07:3608:32दिन
चंद्र08:3209:28दिन
शनि09:2810:24दिन
गुरु10:2411:19दिन
मंगल11:1912:15दिन
सूर्य12:1513:11दिन
शुक्र13:1114:07दिन
बुध14:0715:02दिन
चंद्र15:0215:58दिन
शनि15:5816:54दिन
गुरु16:5417:50दिन
मंगल17:5018:54रात
सूर्य18:5419:58रात
शुक्र19:5821:02रात
बुध21:0222:06रात
चंद्र22:0623:11रात
शनि23:1100:15रात
गुरु00:1501:19रात
मंगल01:1902:23रात
सूर्य02:2303:27रात
शुक्र03:2704:31रात
बुध04:3105:36रात
चंद्र05:3606:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2498° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।