16 अगस्त 2028 को अयोध्या का पंचांग

बुधवार, 16 अगस्त 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 16 अगस्त 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (03:49, 17 अग॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (18:02 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 12:05 से 13:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 18:36
रात 05:33 तक
तिथि
एकादशी, 03:49 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 18:02 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अगस्त 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 03:49, 17 अग॰ तक
कृष्ण द्वादशी 01:43, 18 अग॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 17:00, 17 अग॰ तक
योग
हर्षण 18:12 तक
वज्रअशुभ 15:42, 17 अग॰ तक
करण
बव 16:36 तक
बालव 03:49, 17 अग॰ तक
कौलव 14:51, 17 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 06:17 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
00:47
चंद्रास्त
15:11
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:05 – 13:43
यमगंड
07:11 – 08:49
गुलिक काल
10:27 – 12:05

16 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:33 – 07:11शुभ
अमृत07:11 – 08:49शुभ
काल08:49 – 10:27टालें
शुभ10:27 – 12:05शुभ
रोग12:05 – 13:43टालें
उद्वेग13:43 – 15:21टालें
चर15:21 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:36 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:21शुभ
अमृत21:21 – 22:43शुभ
चर22:43 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:27टालें
काल01:27 – 02:49टालें
लाभ02:49 – 04:11शुभ
उद्वेग04:11 – 05:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3306:38दिन
चंद्र06:3807:44दिन
शनि07:4408:49दिन
गुरु08:4909:54दिन
मंगल09:5410:59दिन
सूर्य10:5912:05दिन
शुक्र12:0513:10दिन
बुध13:1014:15दिन
चंद्र14:1515:21दिन
शनि15:2116:26दिन
गुरु16:2617:31दिन
मंगल17:3118:36दिन
सूर्य18:3619:31रात
शुक्र19:3120:26रात
बुध20:2621:21रात
चंद्र21:2122:15रात
शनि22:1523:10रात
गुरु23:1000:05रात
मंगल00:0501:00रात
सूर्य01:0001:54रात
शुक्र01:5402:49रात
बुध02:4903:44रात
चंद्र03:4404:39रात
शनि04:3905:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2569° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।