26 सितंबर 2028 को अयोध्या का पंचांग

मंगलवार, 26 सितंबर 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 26 सितंबर 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (06:58 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (05:02, 27 सित॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 14:52 से 16:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:52
रात 05:52 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 05:02 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 सितंबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 06:58 तक
शुक्ल नवमी 08:09, 27 सित॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 05:02, 27 सित॰ तक
उत्तराषाढ़ा 07:18, 28 सित॰ तक
योग
शोभन 04:47, 27 सित॰ तक
अतिगंडअशुभ 05:04, 28 सित॰ तक
करण
बव 06:58 तक
बालव 19:29 तक
कौलव 08:09, 27 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
13:26
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
14:52 – 16:22
यमगंड
08:51 – 10:22
गुलिक काल
11:52 – 13:22

26 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:51 – 07:21टालें
उद्वेग07:21 – 08:51टालें
चर08:51 – 10:22सामान्य
लाभ10:22 – 11:52शुभ
अमृत11:52 – 13:22शुभ
काल13:22 – 14:52टालें
शुभ14:52 – 16:22शुभ
रोग16:22 – 17:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:52 – 19:22टालें
लाभ19:22 – 20:52शुभ
उद्वेग20:52 – 22:22टालें
शुभ22:22 – 23:52शुभ
अमृत23:52 – 01:22शुभ
चर01:22 – 02:52सामान्य
रोग02:52 – 04:22टालें
काल04:22 – 05:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5106:51दिन
सूर्य06:5107:51दिन
शुक्र07:5108:51दिन
बुध08:5109:52दिन
चंद्र09:5210:52दिन
शनि10:5211:52दिन
गुरु11:5212:52दिन
मंगल12:5213:52दिन
सूर्य13:5214:52दिन
शुक्र14:5215:52दिन
बुध15:5216:52दिन
चंद्र16:5217:52दिन
शनि17:5218:52रात
गुरु18:5219:52रात
मंगल19:5220:52रात
सूर्य20:5221:52रात
शुक्र21:5222:52रात
बुध22:5223:52रात
चंद्र23:5200:52रात
शनि00:5201:52रात
गुरु01:5202:52रात
मंगल02:5203:52रात
सूर्य03:5204:52रात
शुक्र04:5205:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2585° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।