10 अक्टूबर 2028 को अयोध्या का पंचांग

मंगलवार, 10 अक्टूबर 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 10 अक्टूबर 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (06:02 तक), नक्षत्र मृगशिरा (09:10 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 14:42 से 16:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:37
रात 05:58 तक
तिथि
सप्तमी, 05:48 तक
नक्षत्र
मृगशिरा, 09:10 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:02 तक
कृष्ण सप्तमी 05:48, 11 अक्टू॰ तक
कृष्ण अष्टमी 04:55, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 09:29, 11 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 09:34 तक
परिघअशुभ 08:12, 11 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 06:02 तक
विष्टि (भद्रा) 18:00 तक
बव 05:48, 11 अक्टू॰ तक
बालव 17:26, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
22:26
चंद्रास्त
11:47
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
14:42 – 16:10
यमगंड
08:53 – 10:20
गुलिक काल
11:47 – 13:15

10 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 – 07:25टालें
उद्वेग07:25 – 08:53टालें
चर08:53 – 10:20सामान्य
लाभ10:20 – 11:47शुभ
अमृत11:47 – 13:15शुभ
काल13:15 – 14:42टालें
शुभ14:42 – 16:10शुभ
रोग16:10 – 17:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:37 – 19:10टालें
लाभ19:10 – 20:42शुभ
उद्वेग20:42 – 22:15टालें
शुभ22:15 – 23:48शुभ
अमृत23:48 – 01:20शुभ
चर01:20 – 02:53सामान्य
रोग02:53 – 04:26टालें
काल04:26 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5806:56दिन
सूर्य06:5607:54दिन
शुक्र07:5408:53दिन
बुध08:5309:51दिन
चंद्र09:5110:49दिन
शनि10:4911:47दिन
गुरु11:4712:46दिन
मंगल12:4613:44दिन
सूर्य13:4414:42दिन
शुक्र14:4215:41दिन
बुध15:4116:39दिन
चंद्र16:3917:37दिन
शनि17:3718:39रात
गुरु18:3919:41रात
मंगल19:4120:42रात
सूर्य20:4221:44रात
शुक्र21:4422:46रात
बुध22:4623:48रात
चंद्र23:4800:49रात
शनि00:4901:51रात
गुरु01:5102:53रात
मंगल02:5303:55रात
सूर्य03:5504:56रात
शुक्र04:5605:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2590° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।