8 अप्रैल 2029 को अयोध्या का पंचांग

रविवार, 8 अप्रैल 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 अप्रैल 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (15:46 तक), नक्षत्र श्रवण (13:17 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 18:21 पर है। राहुकाल 16:47 से 18:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 18:21
रात 05:43 तक
तिथि
दशमी, 15:46 तक
एकादशी
नक्षत्र
श्रवण, 13:17 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अप्रैल 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 15:46 तक
कृष्ण एकादशी 17:39, 9 अप्रैल तक
नक्षत्र
श्रवण 13:17 तक
धनिष्ठा 15:41, 9 अप्रैल तक
योग
साध्य 23:19 तक
शुभ 23:51, 9 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:46 तक
बव 04:40, 9 अप्रैल तक
बालव 17:39, 9 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मकर 02:26, 9 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
18:21
चंद्रोदय
02:20
चंद्रास्त
13:44
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
अधिक चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
16:47 – 18:21
यमगंड
12:03 – 13:37
गुलिक काल
15:12 – 16:47

8 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:44 – 07:19टालें
चर07:19 – 08:53सामान्य
लाभ08:53 – 10:28शुभ
अमृत10:28 – 12:03शुभ
काल12:03 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:12शुभ
रोग15:12 – 16:47टालें
उद्वेग16:47 – 18:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:21 – 19:47शुभ
अमृत19:47 – 21:12शुभ
चर21:12 – 22:37सामान्य
रोग22:37 – 00:02टालें
काल00:02 – 01:27टालें
लाभ01:27 – 02:53शुभ
उद्वेग02:53 – 04:18टालें
शुभ04:18 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4406:47दिन
शुक्र06:4707:50दिन
बुध07:5008:53दिन
चंद्र08:5309:57दिन
शनि09:5711:00दिन
गुरु11:0012:03दिन
मंगल12:0313:06दिन
सूर्य13:0614:09दिन
शुक्र14:0915:12दिन
बुध15:1216:15दिन
चंद्र16:1517:18दिन
शनि17:1818:21दिन
गुरु18:2119:18रात
मंगल19:1820:15रात
सूर्य20:1521:12रात
शुक्र21:1222:09रात
बुध22:0923:05रात
चंद्र23:0500:02रात
शनि00:0200:59रात
गुरु00:5901:56रात
मंगल01:5602:53रात
सूर्य02:5303:49रात
शुक्र03:4904:46रात
बुध04:4605:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अप्रैल 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 अप्रैल 2029अधिक चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2029मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैल 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अप्रैल 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अप्रैल 2029चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2659° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।