19 सितंबर 2029 को अयोध्या का पंचांग

बुधवार, 19 सितंबर 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 सितंबर 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (17:59 तक), नक्षत्र श्रवण (11:48 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 11:54 से 13:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:01
रात 05:48 तक
तिथि
द्वादशी, 17:59 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
श्रवण, 11:48 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 सितंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 17:59 तक
शुक्ल त्रयोदशी 18:57, 20 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:48 तक
धनिष्ठा 13:18, 20 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 01:22, 20 सित॰ तक
धृति 01:11, 21 सित॰ तक
करण
बालव 17:59 तक
कौलव 06:25, 20 सित॰ तक
चंद्र राशि
मकर 00:30, 20 सित॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
15:54
चंद्रास्त
02:36
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:19 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:54 – 13:26
यमगंड
07:19 – 08:51
गुलिक काल
10:23 – 11:54

19 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:48 – 07:19शुभ
अमृत07:19 – 08:51शुभ
काल08:51 – 10:23टालें
शुभ10:23 – 11:54शुभ
रोग11:54 – 13:26टालें
उद्वेग13:26 – 14:57टालें
चर14:57 – 16:29सामान्य
लाभ16:29 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:01 – 19:29टालें
शुभ19:29 – 20:58शुभ
अमृत20:58 – 22:26शुभ
चर22:26 – 23:54सामान्य
रोग23:54 – 01:23टालें
काल01:23 – 02:51टालें
लाभ02:51 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4806:49दिन
चंद्र06:4907:50दिन
शनि07:5008:51दिन
गुरु08:5109:52दिन
मंगल09:5210:53दिन
सूर्य10:5311:54दिन
शुक्र11:5412:55दिन
बुध12:5513:56दिन
चंद्र13:5614:57दिन
शनि14:5715:58दिन
गुरु15:5817:00दिन
मंगल17:0018:01दिन
सूर्य18:0119:00रात
शुक्र19:0019:59रात
बुध19:5920:58रात
चंद्र20:5821:57रात
शनि21:5722:55रात
गुरु22:5523:54रात
मंगल23:5400:53रात
सूर्य00:5301:52रात
शुक्र01:5202:51रात
बुध02:5103:50रात
चंद्र03:5004:49रात
शनि04:4905:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2722° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।