18 नवंबर 2026 को बर्धमान का पंचांग

बुधवार, 18 नवंबर 2026, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 18 नवंबर 2026 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (06:05 तक), नक्षत्र शतभिषा (06:10, 19 नव॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 16:53 पर है। राहुकाल 11:23 से 12:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 16:53
रात 05:54 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 06:05 तक
शुक्ल नवमी 07:06, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:10, 19 नव॰ तक
योग
ध्रुव 08:05 तक
व्याघातअशुभ 07:42, 19 नव॰ तक
करण
बव 06:05 तक
बालव 18:42 तक
कौलव 07:06, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
16:53
चंद्रोदय
12:31
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:45 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:23 – 12:45
यमगंड
07:16 – 08:38
गुलिक काल
10:01 – 11:23

18 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:54 – 07:16शुभ
अमृत07:16 – 08:38शुभ
काल08:38 – 10:01टालें
शुभ10:01 – 11:23शुभ
रोग11:23 – 12:45टालें
उद्वेग12:45 – 14:08टालें
चर14:08 – 15:30सामान्य
लाभ15:30 – 16:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:53 – 18:30टालें
शुभ18:30 – 20:08शुभ
अमृत20:08 – 21:46शुभ
चर21:46 – 23:23सामान्य
रोग23:23 – 01:01टालें
काल01:01 – 02:39टालें
लाभ02:39 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5406:49दिन
चंद्र06:4907:43दिन
शनि07:4308:38दिन
गुरु08:3809:33दिन
मंगल09:3310:28दिन
सूर्य10:2811:23दिन
शुक्र11:2312:18दिन
बुध12:1813:13दिन
चंद्र13:1314:08दिन
शनि14:0815:03दिन
गुरु15:0315:58दिन
मंगल15:5816:53दिन
सूर्य16:5317:58रात
शुक्र17:5819:03रात
बुध19:0320:08रात
चंद्र20:0821:13रात
शनि21:1322:18रात
गुरु22:1823:23रात
मंगल23:2300:29रात
सूर्य00:2901:34रात
शुक्र01:3402:39रात
बुध02:3903:44रात
चंद्र03:4404:49रात
शनि04:4905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां बर्धमान में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2325° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।