9 जनवरी 2025 को बरेली का पंचांग

गुरुवार, 9 जनवरी 2025, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 9 जनवरी 2025 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (12:23 तक), नक्षत्र भरणी (15:07 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 13:37 से 14:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:33
रात 07:05 तक
तिथि
दशमी, 12:23 तक
एकादशी
नक्षत्र
भरणी, 15:07 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 जनवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 12:23 तक
शुक्ल एकादशी 10:20, 10 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 15:07 तक
कृत्तिका 13:45, 10 जन॰ तक
योग
साध्य 17:29 तक
शुभ 14:36, 10 जन॰ तक
करण
गर 12:23 तक
वणिज 23:21 तक
विष्टि (भद्रा) 10:20, 10 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 20:46 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
13:12
चंद्रास्त
02:19
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
13:37 – 14:56
यमगंड
07:05 – 08:24
गुलिक काल
09:42 – 11:01

9 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:05 – 08:24शुभ
रोग08:24 – 09:42टालें
उद्वेग09:42 – 11:01टालें
चर11:01 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 13:37शुभ
अमृत13:37 – 14:56शुभ
काल14:56 – 16:14टालें
शुभ16:14 – 17:33शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:33 – 19:14शुभ
चर19:14 – 20:56सामान्य
रोग20:56 – 22:37टालें
काल22:37 – 00:19टालें
लाभ00:19 – 02:01शुभ
उद्वेग02:01 – 03:42टालें
शुभ03:42 – 05:24शुभ
अमृत05:24 – 07:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0507:58दिन
मंगल07:5808:50दिन
सूर्य08:5009:42दिन
शुक्र09:4210:34दिन
बुध10:3411:27दिन
चंद्र11:2712:19दिन
शनि12:1913:11दिन
गुरु13:1114:04दिन
मंगल14:0414:56दिन
सूर्य14:5615:48दिन
शुक्र15:4816:40दिन
बुध16:4017:33दिन
चंद्र17:3318:40रात
शनि18:4019:48रात
गुरु19:4820:56रात
मंगल20:5622:04रात
सूर्य22:0423:11रात
शुक्र23:1100:19रात
बुध00:1901:27रात
चंद्र01:2702:34रात
शनि02:3403:42रात
गुरु03:4204:50रात
मंगल04:5005:58रात
सूर्य05:5807:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2066° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।