15 नवंबर 2025 को बरेली का पंचांग

शनिवार, 15 नवंबर 2025, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 नवंबर 2025 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (02:37, 16 नव॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (23:34 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 09:15 से 10:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:19
रात 06:35 तक
तिथि
एकादशी, 02:37 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 23:34 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:37, 16 नव॰ तक
कृष्ण द्वादशी 04:48, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:11, 17 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 06:46, 16 नव॰ तक
करण
बव 13:40 तक
बालव 02:37, 16 नव॰ तक
कौलव 15:40, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
02:05
चंद्रास्त
14:27
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
09:15 – 10:36
यमगंड
13:17 – 14:37
गुलिक काल
06:34 – 07:54

15 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:34 – 07:54टालें
शुभ07:54 – 09:15शुभ
रोग09:15 – 10:36टालें
उद्वेग10:36 – 11:56टालें
चर11:56 – 13:17सामान्य
लाभ13:17 – 14:37शुभ
अमृत14:37 – 15:58शुभ
काल15:58 – 17:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:19 – 18:58शुभ
उद्वेग18:58 – 20:38टालें
शुभ20:38 – 22:17शुभ
अमृत22:17 – 23:57शुभ
चर23:57 – 01:36सामान्य
रोग01:36 – 03:16टालें
काल03:16 – 04:55टालें
लाभ04:55 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3407:28दिन
गुरु07:2808:21दिन
मंगल08:2109:15दिन
सूर्य09:1510:09दिन
शुक्र10:0911:02दिन
बुध11:0211:56दिन
चंद्र11:5612:50दिन
शनि12:5013:44दिन
गुरु13:4414:37दिन
मंगल14:3715:31दिन
सूर्य15:3116:25दिन
शुक्र16:2517:19दिन
बुध17:1918:25रात
चंद्र18:2519:31रात
शनि19:3120:38रात
गुरु20:3821:44रात
मंगल21:4422:50रात
सूर्य22:5023:57रात
शुक्र23:5701:03रात
बुध01:0302:09रात
चंद्र02:0903:16रात
शनि03:1604:22रात
गुरु04:2205:28रात
मंगल05:2806:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2185° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।