21 फ़रवरी 2026 को बरेली का पंचांग

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (13:01 तक), नक्षत्र रेवती (19:07 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 18:06 पर है। राहुकाल 09:35 से 11:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 18:06
रात 06:44 तक
तिथि
चतुर्थी, 13:01 तक
पंचमी
नक्षत्र
रेवती, 19:07 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 13:01 तक
शुक्ल पंचमी 11:10, 22 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 19:07 तक
अश्विनी 17:54, 22 फ़र॰ तक
योग
शुभ 15:51 तक
शुक्ल 13:08, 22 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:01 तक
बव 00:07, 22 फ़र॰ तक
बालव 11:10, 22 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 19:07 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
18:06
चंद्रोदय
08:48
चंद्रास्त
22:05
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
09:35 – 11:00
यमगंड
13:51 – 15:16
गुलिक काल
06:45 – 08:10

21 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:45 – 08:10टालें
शुभ08:10 – 09:35शुभ
रोग09:35 – 11:00टालें
उद्वेग11:00 – 12:26टालें
चर12:26 – 13:51सामान्य
लाभ13:51 – 15:16शुभ
अमृत15:16 – 16:41शुभ
काल16:41 – 18:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:06 – 19:41शुभ
उद्वेग19:41 – 21:16टालें
शुभ21:16 – 22:50शुभ
अमृत22:50 – 00:25शुभ
चर00:25 – 02:00सामान्य
रोग02:00 – 03:34टालें
काल03:34 – 05:09टालें
लाभ05:09 – 06:44शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4507:42दिन
गुरु07:4208:38दिन
मंगल08:3809:35दिन
सूर्य09:3510:32दिन
शुक्र10:3211:29दिन
बुध11:2912:26दिन
चंद्र12:2613:22दिन
शनि13:2214:19दिन
गुरु14:1915:16दिन
मंगल15:1616:13दिन
सूर्य16:1317:10दिन
शुक्र17:1018:06दिन
बुध18:0619:09रात
चंद्र19:0920:13रात
शनि20:1321:16रात
गुरु21:1622:19रात
मंगल22:1923:22रात
सूर्य23:2200:25रात
शुक्र00:2501:28रात
बुध01:2802:31रात
चंद्र02:3103:34रात
शनि03:3404:38रात
गुरु04:3805:41रात
मंगल05:4106:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2222° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।