10 जनवरी 2027 को बरेली का पंचांग

रविवार, 10 जनवरी 2027, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 10 जनवरी 2027 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (07:07 तक), नक्षत्र श्रवण (15:12 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 16:15 से 17:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:33
रात 07:05 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण, 15:12 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जनवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 07:07 तक
शुक्ल तृतीया 09:28, 11 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 15:12 तक
धनिष्ठा 17:53, 11 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 17:02 तक
सिद्धि 17:38, 11 जन॰ तक
करण
कौलव 07:07 तक
तैतिल 20:20 तक
गर 09:28, 11 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 04:35, 11 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
08:41
चंद्रास्त
19:48
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
16:15 – 17:33
यमगंड
12:19 – 13:38
गुलिक काल
14:56 – 16:15

10 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:05 – 08:24टालें
चर08:24 – 09:42सामान्य
लाभ09:42 – 11:01शुभ
अमृत11:01 – 12:19शुभ
काल12:19 – 13:38टालें
शुभ13:38 – 14:56शुभ
रोग14:56 – 16:15टालें
उद्वेग16:15 – 17:33टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:33 – 19:15शुभ
अमृत19:15 – 20:56शुभ
चर20:56 – 22:38सामान्य
रोग22:38 – 00:19टालें
काल00:19 – 02:01टालें
लाभ02:01 – 03:42शुभ
उद्वेग03:42 – 05:24टालें
शुभ05:24 – 07:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0507:58दिन
शुक्र07:5808:50दिन
बुध08:5009:42दिन
चंद्र09:4210:35दिन
शनि10:3511:27दिन
गुरु11:2712:19दिन
मंगल12:1913:12दिन
सूर्य13:1214:04दिन
शुक्र14:0414:56दिन
बुध14:5615:48दिन
चंद्र15:4816:41दिन
शनि16:4117:33दिन
गुरु17:3318:41रात
मंगल18:4119:48रात
सूर्य19:4820:56रात
शुक्र20:5622:04रात
बुध22:0423:12रात
चंद्र23:1200:19रात
शनि00:1901:27रात
गुरु01:2702:35रात
मंगल02:3503:42रात
सूर्य03:4204:50रात
शुक्र04:5005:58रात
बुध05:5807:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2346° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।