5 फ़रवरी 2027 को बरेली का पंचांग

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2027, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2027 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (19:05 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (18:32 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 11:04 से 12:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 17:54
रात 06:57 तक
तिथि
चतुर्दशी, 19:05 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 18:32 तक
श्रवण
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:05 तक
अमावस्या 21:26, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 21:19, 6 फ़र॰ तक
योग
सिद्धि 20:33 तक
व्यतीपातअशुभ 21:14, 6 फ़र॰ तक
करण
शकुनि 19:05 तक
चतुष्पद 08:18, 6 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
06:07
चंद्रास्त
16:46
दिनमान
10h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
11:04 – 12:26
यमगंड
15:10 – 16:32
गुलिक काल
08:20 – 09:42

5 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:57 – 08:20सामान्य
लाभ08:20 – 09:42शुभ
अमृत09:42 – 11:04शुभ
काल11:04 – 12:26टालें
शुभ12:26 – 13:48शुभ
रोग13:48 – 15:10टालें
उद्वेग15:10 – 16:32टालें
चर16:32 – 17:54सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:54 – 19:32टालें
काल19:32 – 21:10टालें
लाभ21:10 – 22:48शुभ
उद्वेग22:48 – 00:26टालें
शुभ00:26 – 02:03शुभ
अमृत02:03 – 03:41शुभ
चर03:41 – 05:19सामान्य
रोग05:19 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5707:52दिन
बुध07:5208:47दिन
चंद्र08:4709:42दिन
शनि09:4210:36दिन
गुरु10:3611:31दिन
मंगल11:3112:26दिन
सूर्य12:2613:21दिन
शुक्र13:2114:15दिन
बुध14:1515:10दिन
चंद्र15:1016:05दिन
शनि16:0517:00दिन
गुरु17:0017:54दिन
मंगल17:5419:00रात
सूर्य19:0020:05रात
शुक्र20:0521:10रात
बुध21:1022:15रात
चंद्र22:1523:20रात
शनि23:2000:26रात
गुरु00:2601:31रात
मंगल01:3102:36रात
सूर्य02:3603:41रात
शुक्र03:4104:46रात
बुध04:4605:52रात
चंद्र05:5206:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2356° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।