8 फ़रवरी 2027 को बरेली का पंचांग

सोमवार, 8 फ़रवरी 2027, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 8 फ़रवरी 2027 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (01:06, 9 फ़र॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (01:57, 9 फ़र॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 08:18 से 09:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:57
रात 06:55 तक
तिथि
द्वितीया, 01:06 तक
तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा, 01:57 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:06, 9 फ़र॰ तक
शुक्ल तृतीया 02:20, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 01:57, 9 फ़र॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 03:40, 10 फ़र॰ तक
योग
परिघअशुभ 21:51 तक
शिव 21:43, 9 फ़र॰ तक
करण
बालव 12:20 तक
कौलव 01:06, 9 फ़र॰ तक
तैतिल 13:47, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
07:44
चंद्रास्त
19:32
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
08:18 – 09:41
यमगंड
11:03 – 12:26
गुलिक काल
13:49 – 15:11

8 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:55 – 08:18शुभ
काल08:18 – 09:41टालें
शुभ09:41 – 11:03शुभ
रोग11:03 – 12:26टालें
उद्वेग12:26 – 13:49टालें
चर13:49 – 15:11सामान्य
लाभ15:11 – 16:34शुभ
अमृत16:34 – 17:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:57 – 19:34सामान्य
रोग19:34 – 21:11टालें
काल21:11 – 22:48टालें
लाभ22:48 – 00:26शुभ
उद्वेग00:26 – 02:03टालें
शुभ02:03 – 03:40शुभ
अमृत03:40 – 05:18शुभ
चर05:18 – 06:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5507:51दिन
शनि07:5108:46दिन
गुरु08:4609:41दिन
मंगल09:4110:36दिन
सूर्य10:3611:31दिन
शुक्र11:3112:26दिन
बुध12:2613:21दिन
चंद्र13:2114:16दिन
शनि14:1615:11दिन
गुरु15:1116:06दिन
मंगल16:0617:02दिन
सूर्य17:0217:57दिन
शुक्र17:5719:02रात
बुध19:0220:06रात
चंद्र20:0621:11रात
शनि21:1122:16रात
गुरु22:1623:21रात
मंगल23:2100:26रात
सूर्य00:2601:31रात
शुक्र01:3102:35रात
बुध02:3503:40रात
चंद्र03:4004:45रात
शनि04:4505:50रात
गुरु05:5006:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2357° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।