20 दिसंबर 2027 को बरेली का पंचांग

सोमवार, 20 दिसंबर 2027, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 दिसंबर 2027 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (01:53, 21 दिस॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (01:05, 21 दिस॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 08:16 से 09:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 17:19
रात 06:59 तक
तिथि
अष्टमी, 01:53 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 01:05 तक
हस्त
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 01:53, 21 दिस॰ तक
कृष्ण नवमी 00:35, 22 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 01:05, 21 दिस॰ तक
हस्त 00:25, 22 दिस॰ तक
योग
आयुष्मान 17:56 तक
सौभाग्य 15:33, 21 दिस॰ तक
करण
बालव 14:40 तक
कौलव 01:53, 21 दिस॰ तक
तैतिल 13:11, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 07:49 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:52
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
08:16 – 09:34
यमगंड
10:52 – 12:09
गुलिक काल
13:27 – 14:44

20 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:59 – 08:16शुभ
काल08:16 – 09:34टालें
शुभ09:34 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:09टालें
उद्वेग12:09 – 13:27टालें
चर13:27 – 14:44सामान्य
लाभ14:44 – 16:02शुभ
अमृत16:02 – 17:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:19 – 19:02सामान्य
रोग19:02 – 20:44टालें
काल20:44 – 22:27टालें
लाभ22:27 – 00:09शुभ
उद्वेग00:09 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:34शुभ
अमृत03:34 – 05:17शुभ
चर05:17 – 06:59सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5907:51दिन
शनि07:5108:42दिन
गुरु08:4209:34दिन
मंगल09:3410:26दिन
सूर्य10:2611:17दिन
शुक्र11:1712:09दिन
बुध12:0913:01दिन
चंद्र13:0113:53दिन
शनि13:5314:44दिन
गुरु14:4415:36दिन
मंगल15:3616:28दिन
सूर्य16:2817:19दिन
शुक्र17:1918:28रात
बुध18:2819:36रात
चंद्र19:3620:44रात
शनि20:4421:53रात
गुरु21:5323:01रात
मंगल23:0100:09रात
सूर्य00:0901:18रात
शुक्र01:1802:26रात
बुध02:2603:34रात
चंद्र03:3404:43रात
शनि04:4305:51रात
गुरु05:5106:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2477° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।